मनीष तिवारी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर तत्काल चर्चा कराने दिया स्थगन प्रस्ताव

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नई दिल्ली । भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर संसद में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बुधवार को लोकसभा में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने लोकसभा के महासचिव को पत्र लिखकर प्रश्नकाल, शून्यकाल और दिन की अन्य सभी कार्यवाहियों को स्थगित कर इस गंभीर सार्वजनिक विषय पर बहस कराने की अनुमति मांगी है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने अपने पत्र में कहा कि यह मामला राष्ट्रीय हित, आर्थिक सुरक्षा और विदेश नीति से सीधे जुड़ा हुआ है, जिस पर संसद की जानकारी और चर्चा अनिवार्य है। उन्होंने लिखा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से कथित रूप से ऐसा बयान सामने आया है, जिसमें दावा किया गया है कि भारत के प्रधानमंत्री इस व्यापार समझौते की शर्तों पर सहमत हो गए हैं। तिवारी के अनुसार, यह दावा अत्यंत गंभीर है और इसकी सच्चाई सदन के सामने स्पष्ट की जानी चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि इस कथित समझौते के तहत भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने, अमेरिका और वेनेजुएला से तेल आयात में भारी वृद्धि करने, भारतीय टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को लगभग शून्य करने तथा 500 बिलियन डॉलर से अधिक के अमेरिकी उत्पाद खरीदने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो इसके दूरगामी आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पड़ सकते हैं।
तिवारी ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया कि रूसी कच्चे तेल की खरीद से देश में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली है। यदि इसमें अचानक बदलाव किया गया, तो आम नागरिकों, परिवहन क्षेत्र और उद्योगों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसके साथ ही, बड़े व्यापार समझौते घरेलू विनिर्माण, किसानों और लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि वह इस पूरे मामले पर तुरंत स्पष्ट बयान दे और संसद में विस्तृत चर्चा की अनुमति दे। तिवारी ने कहा कि व्यापार, ऊर्जा और विदेश नीति जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बिना पारदर्शिता के लिए गए निर्णय देशहित में नहीं हैं।