नई दिल्ली । भारत की बहुप्रतीक्षित आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू होते ही तत्काल जाति जनगणना शुरू नहीं की जाएगी, बल्कि इसके लिए देशवासियों को दूसरे चरण का इंतजार करना होगा। राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि जाति से संबंधित विशिष्ट सवालों को दूसरे चरण की शुरुआत से ठीक पहले अधिसूचित किया जाएगा।
गृह मंत्रालय के अनुसार, इस विशाल राष्ट्रीय कार्य को दो मुख्य हिस्सों में विभाजित किया गया है। योजना के मुताबिक, पूरे देश में जनसंख्या की वास्तविक गिनती का काम मुख्य रूप से फरवरी 2027 में शुरू किया जाएगा। हालांकि, भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी व बर्फीले राज्यों के दुर्गम इलाकों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में ही शुरू कर दी जाएगी। मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि इस संबंध में विस्तृत जानकारी दिसंबर 2025 में ही सार्वजनिक कर दी गई थी, लेकिन कुछ वर्गों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने के लिए सरकार ने दोबारा तारीखों और प्रक्रिया को स्पष्ट करना आवश्यक समझा है।
जनगणना का पहला चरण मकान सूचीकरण (हाउसलिस्टिंग) और उनकी गणना पर केंद्रित होगा। इस चरण के लिए सरकार ने 22 जनवरी को 33 प्रश्नों की एक सूची अधिसूचित की है। इनमें घर के मुखिया का लिंग, मकान में इस्तेमाल की गई सामग्री, विवाहित जोड़ों की संख्या, उपभोग किए जाने वाले अनाज का प्रकार, बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच और वाहनों के प्रकार जैसे विवरण शामिल होंगे। यह चरण इस साल 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच संपन्न होगा, जिसमें प्रत्येक राज्य अपनी सुविधानुसार 30 दिनों की अवधि तय करेंगे। खास बात यह है कि हाउसलिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन जानकारी भरने का विकल्प भी दिया जाएगा।
वहीं, जाति जनगणना का महत्वपूर्ण कार्य दूसरे चरण के दौरान किया जाएगा। इस स्पष्टीकरण के बावजूद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल का जाति जनगणना कराने का कोई वास्तविक इरादा नहीं है और यह पिछड़ों, दलितों तथा अल्पसंख्यकों (पीडीए) के साथ धोखा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि मौजूदा नोटिफिकेशन में जाति के लिए कोई कॉलम ही नहीं रखा गया है। कांग्रेस ने भी इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। जवाब में सरकार ने साफ किया है कि दूसरे चरण के दौरान ही जातिगत डेटा एकत्र किया जाएगा और इसके लिए अलग से अधिसूचना जारी होगी।

