गर्भ संस्कार ही राष्ट्र निर्माण की सशक्त नींव, अस्पतालों में बनेंगे विशेष गर्भ संस्कार कक्ष : डॉ. मोहन यादव

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इंदौर में दिव्य संतान प्रकल्प का शुभारंभ; मुख्यमंत्री ने कहा- अभिमन्यु और अष्टावक्र के संस्कार गर्भावस्था से ही हुए थे जागृत
इंदौर । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सनातन संस्कृति में संतान केवल वंश वृद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि परिवार से राष्ट्र निर्माण तक की एक अमर धारा है। रविवार को इंदौर में दिव्य संतान प्रकल्प के तहत आयोजित गरिमामय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार अब आयुष्मान भारत और आयुष मंत्रालय के माध्यम से गर्भ संस्कार को संस्थागत रूप देने जा रही है। भविष्य में अस्पतालों के डिज़ाइन में विशेष गर्भ संस्कार कक्ष भी शामिल किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और एलोपैथी के चिकित्सक भी गर्भ संस्कार के सकारात्मक प्रभावों को स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने अभिमन्यु और अष्टावक्र के पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि ज्ञान और संस्कार गर्भावस्था से ही शिशु पर प्रभाव डालते हैं। डॉ. यादव ने नॉर्मल डिलीवरी को बढ़ावा देने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने जानकारी दी कि प्रदेश में 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोलने का निर्णय लिया गया है, जिनमें से 8 प्रारंभ हो चुके हैं।
:: संस्कार बिना शक्ति अधूरी : भैयाजी जोशी
कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी भैयाजी जोशी ने कहा कि श्रेष्ठ मनुष्य का निर्माण भौतिक संपदा से नहीं, बल्कि सुशिक्षा और सुसंस्कार से ही संभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब शस्त्र अयोग्य हाथों में चले जाते हैं तो विनाश होता है, इसलिए शक्ति के साथ संस्कार अनिवार्य हैं। उन्होंने इंदौर को देवी अहिल्याबाई की पुण्य नगरी बताते हुए कहा कि यहाँ से शुरू हुआ यह विचार पूरे विश्व को मार्गदर्शन देगा।
:: पुस्तक का विमोचन और सम्मान ::
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डॉ. अनिल कुमार गर्ग एवं सीमा गर्ग द्वारा लिखित पुस्तक शंखनाद दिव्य संतान का का विमोचन किया। साथ ही, उन्होंने पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास का सम्मान भी किया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित अनेक जनप्रतिनिधि और चिकित्सा विशेषज्ञ मौजूद थे।