डिजिटल युग में जहाँ पहचान अक्सर क्लिकबेट और दुरुपयोग का शिकार हो जाती है, वहीं अभिनेता और उद्यमी विवेक आनंद ओबेरॉय के पक्ष में आया दिल्ली हाईकोर्ट का ताज़ा फैसला एक मिसाल बनकर उभरा है। इस ऐतिहासिक कानूनी जीत के पीछे वरिष्ठ अधिवक्ता सना रईस खान की सशक्त और संवेदनशील पैरवी रही, जिसने पर्सनैलिटी राइट्स की पवित्रता को नए सिरे से परिभाषित किया। विवेक ओबेरॉय ने कहा,“यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की जीत है जिसकी पहचान को डिजिटल शोर में गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। कानून का यह संरक्षण बेहद आश्वस्त करने वाला है।” वहीं सना रईस खान ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “किसी भी व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक संपत्ति नहीं है। यह फैसला निजता, गरिमा और मानवीय मूल्यों की न्यायिक पुष्टि है।”

