जयपुर में सीजेआई ने किया खुलासा बोले- मेरे नाम से नाइजीरिया में बनीं फर्जी साइट्स

देश

जयपुर । साइबर सिक्योरिटी- अवेयरनेस, प्रोटेक्शन, एंड इंक्लूसिव एक्सेस टू जस्टिस विषय पर आयोजित तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने डिजिटल सुरक्षा और न्याय प्रणाली के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। इस दौरान सीजेआई ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि वह स्वयं और उनका परिवार भी साइबर अपराधियों के निशाने पर रहा है। उन्होंने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि नाइजीरिया में उनके नाम पर फर्जी वेबसाइट्स बनाई गईं और उनके परिवार के सदस्यों को संदेश भेजे गए।
सीजेआई सूर्य कांत ने बताया कि उन्हें लगभग हर दूसरे दिन अपने नाम पर बनी नई फर्जी साइट्स के बारे में पता चलता है। इन फर्जी साइट्स के जरिए उनकी बहनों और उनकी बेटियों जैसे युवा वकीलों को मैसेज भेजे गए। उन्होंने इस स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ये फर्जी गतिविधियां मुख्य रूप से नाइजीरिया से संचालित की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल क्रांति ने जहां गवर्नेंस, सेवाओं और संचार को सुगम बनाया है, वहीं इसके खतरों से भी निपटने की तत्काल आवश्यकता है। सीजेआई ने कड़े लहजे में यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान मौजूद नहीं है, इसलिए आम जनता को ऐसे दावों से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना नागरिक शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए और सभी संस्थानों को एक समन्वित भागीदार के रूप में मिलकर काम करना चाहिए।
इसी कॉन्फ्रेंस के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए राज्य में एक स्पेशल साइबर कोर्ट बनाने का ऐतिहासिक ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में तकनीक के विस्तार के साथ साइबर अपराध की चुनौतियां बढ़ी हैं, जिनसे निपटने के लिए विशेष न्यायिक ढांचे की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस विशेष अदालत से न केवल मामलों के निपटान में तेजी आएगी, बल्कि जनता में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। मुख्य न्यायाधीश ने इस पहल के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में राजस्थान की उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी, डॉ. प्रेमचंद बैरवा और कानून मंत्री जोगाराम पटेल सहित कई राजनीतिक और कानूनी हस्तियां मौजूद रहीं। सभी ने डिजिटल सुरक्षा के महत्व और साइबर जागरूकता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। विशेषज्ञों और सीजेआई ने इस बात पर बल दिया कि केवल तकनीकी समाधान ही पर्याप्त नहीं हैं, व्यक्तिगत डेटा और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा के लिए सख्त नीतियों के साथ-साथ समाज के हर वर्ग को शिक्षित करना अनिवार्य है। कॉन्फ्रेंस का मुख्य निष्कर्ष यह रहा कि समावेशी न्याय के लिए तकनीक और सतर्कता का मेल होना जरूरी है ताकि डिजिटल दुनिया सुरक्षित बनी रहे।