इन्दौर | एक दर्दनाक हादसे में मां बाप की लापरवाही नाबालिग की मौत की वजह बन गई। नाबालिग ने कार को तेज रफ्तार में दौड़ाया और अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार हो गया। जबकि शहर में ट्राफिक पुलिस लोगों को ट्राफिक नियमों के पालन हेतु लगाया जागरूक करने के लिए अभियान पर अभियान चला रही है यहीं नहीं इस तरह नाबालिगों द्वारा वाहन चालन के मामलों में उनके अभिभावकों को भी दंडित किया जा रहा है परन्तु फिर भी में लापरवाह अभिभावक अपने बच्चों के साथ दूसरों की जान भी जोखिम में डालने की लापरवाही करने से बाज नहीं आ रहे। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ और माता-पिता ने अपनी लापरवाही से अपने घर के चिराग को बुझा दिया। मामला खुड़ैल थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार हादसा इंडेक्स कॉलेज के सामने हुआ। मृतक का नाम सुशांत पिता अजय चौहान उम्र सत्रह वर्ष निवासी विनायक टाउनशिप, देवगुराड़िया है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि तेज रफ्तार कार उसके चालक द्वारा ब्रेक लगाने पर अनियंत्रित होकर चार पलटी खाते हुए दो सिग्नलों को टक्कर मार पार्किंग में खड़ी बस से टकरा गई। इस दौरान कार चालक चलती कार से बाहर गिरा और उसके सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई, वहीं उसके साथ बैठा उसका दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं मृतक नाबालिग कार चालक सुशांत के परिजनों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि सुशांत का पन्द्रह वर्षीय दोस्त अपने जीजा की कार मांगकर लाया था। उसने बाहर से सुशांत को फोन लगाया और फिर वे इंडेक्स कॉलेज की तरफ निकले थे। दोपहर 1.30 बजे घटना के वीडियो वायरल होने पर उन्हें हादसे का पता चला तो वे मौके पर पहुंचे। और उन्हें भी घटनास्थल के पास स्थित ढाबे पर बैठे लोगों ने बताया कि कार की स्पीड बहुत ज्यादा थी। जैसे ही बच्चों ने ब्रेक लगाया, कार अनियंत्रित होकर मिट्टी के ढेर से उछलकर 3-4 पलटियां खाते हुए दो खंभों से टकराई, इसके बाद भी वह नहीं रुकी और फिर बस में टकरा गई। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में पुलिस का कहना है कि नाबालिग बच्चों को इस तरह वाहन चलाने के छूट देना अन्य लोगों के साथ साथ उनकी खुद की ज़िंदगी के साथ भी खिलवाड़ है। इसके लिए इन्दौर यातायात पुलिस लगातार लोगों को जागरूक करने के साथ उनसे अपील निवेदन करती है लेकिन फिर भी ऐसी लापरवाही सामने आती हैं। इस मामले में यदि नाबालिग सुशांत के माता-पिता लापरवाही छोड़ थोड़ी भी जागरूकता का परिचय देते और सुशांत को कार चलाने से रोक लेते तो शायद उसकी मौत जैसी दुखद घटना टल सकती थी।

