युद्ध का असर: पाकिस्तान में कोरोना जैसे प्रतिबंध, सीमित मात्रा में मिलेगा पेट्रोल, करना पड़ेगा वर्क फ्रोम होम

अंतरराष्ट्रीय

इस्लामाबाद । मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष का सीधा और भयावह असर अब पड़ोसी देश पाकिस्तान पर दिखने लगा है। क्षेत्र में जारी भीषण युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल और आपूर्ति बाधित होने से पाकिस्तान में ईंधन का गंभीर संकट पैदा हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में देश भर में पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल को सीमित करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि युद्ध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो आने वाले समय में ऊर्जा संकट और अधिक गहरा सकता है।ईंधन बचाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने देश में वर्क फ्रॉम होम और चार दिवसीय कार्य सप्ताह जैसे नियमों को फिर से लागू कर दिया है, जो सामान्यतः कोरोना काल के दौरान देखे गए थे।
नए आदेशों के अनुसार, सभी सरकारी कार्यालयों को सप्ताह में केवल चार दिन कार्य करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, जिन विभागों में संभव है, वहां 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा गया है। सरकारी अधिकारियों के पेट्रोल खर्च में भी तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है। प्रांतों को भी कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने स्तर पर पेट्रोलियम की खपत कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमतें 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती हैं। इस संकट की शुरुआत 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद हुई, जिसके जवाब में ईरान ने सऊदी अरब की यानबू रिफाइनरी और कुवैत के तेल केंद्रों को निशाना बनाया। इन हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को हिलाकर रख दिया है। पाकिस्तान का खुफिया विभाग (आईबी) वर्तमान स्थितियों पर निरंतर नजर रख रहा है और देशभर की रिपोर्ट सरकार को सौंप रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आम जनता से भी अपील की है कि वे कार पूलिंग अपनाएं और पेट्रोल-डीजल का कम से कम उपयोग करें। उन्होंने देश को आगाह किया है कि आने वाली किसी भी कठिन परिस्थिति के लिए तैयार रहना जरूरी है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने आश्वासन दिया है कि ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्रों पर और हमले नहीं होंगे, लेकिन कतर या अन्य अरब देशों पर हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी ने तनाव को कम नहीं होने दिया है। फिलहाल, पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने खाली होते तेल भंडारों को बचाए रखना है।