-जर्मनी में की जा रही नई तकनीक विकसित, कॉकरोच को रोबोट बनाकर कराएंगे जासूसी
बर्लिन । जर्मनी में एक ऐसी तकनीक विकसित की जा रही है जो फिल्मों की कहानी की तरह है। यहां वैज्ञानिक कॉकरोच को रोबोट में बदलने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उन्हें जासूसी और सैन्य मिशनों में इस्तेमाल किया जा सके। इन्हें कॉकरोच साइबॉर्ग भी कहा जा रहा है। जर्मनी की स्टार्टअप कंपनी ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिसमें असली कॉकरोच के ऊपर छोटे-छोटे इलेक्ट्रॉनिक बैकपैक लगाए जाते हैं। इन बैकपैक में सेंसर, कैमरा और कम्युनिकेशन सिस्टम होते हैं, जिनकी मदद से यह कीड़े दुश्मन के इलाके में जाकर जानकारी जुटा सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह टेक खासतौर पर उन जगहों के लिए बनाई जा रही है जहां इंसान, ड्रोन या पारंपरिक रोबोट पहुंच नहीं पाते जैसे- ढही हुई इमारतें, संकरी सुरंगें या युद्ध क्षेत्र। इन जगहों पर ये छोटे-छोटे जैविक रोबोट आसानी से घुसकर जानकारी इकट्ठा कर सकते हैं। इन कॉकरोच के ऊपर जो माइक्रो बैकपैक लगाया जाता है उसमें कई तरह के उपकरण लगे होते हैं। इनमें सेंसर, कैमरा और कम्युनिकेशन मॉड्यूल शामिल होते हैं। यह सिस्टम रियल-टाइम डेटा भेज सकता है और आसपास के माहौल की जानकारी भी जुटा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिक इन कीड़ों की मूवमेंट को भी नियंत्रित कर सकते हैं। इसके लिए हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजे जाते हैं, जिनकी मदद से ऑपरेटर दूर बैठकर भी कॉकरोच की दिशा नियंत्रित कर सकते हैं। कुछ मामलों में ये कीड़े एआई की मदद से भी काम कर सकते हैं, जिससे बड़े इलाके की निगरानी करना आसान हो जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कॉकरोच प्रकृति के सबसे मजबूत और टिकाऊ जीवों में से एक हैं। ये बेहद संकरी जगहों में भी घुस सकते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी जिंदा रह सकते हैं।
यही वजह है कि इन्हें ऐसे मिशनों के लिए आइडियल माना जा रहा है। इसके अलावा ये हल्के उपकरण भी अपने शरीर पर लेकर चल सकते हैं। अभी इन पर करीब 10 से 15 ग्राम तक का माइक्रो बैकपैक लगाया जा सकता है, जिससे कैमरा और सेंसर जैसे उपकरण लगाए जा सकते हैं। यह तकनीक सिर्फ सैन्य जासूसी के लिए ही नहीं बल्कि कई अन्य कामों में भी इस्तेमाल हो सकती है। उदाहरण के लिए भूकंप या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ढही हुई इमारतों में फंसे लोगों को खोजने के लिए भी इन रोबोटिक तिलचट्टों को भेजा जा सकता है। दुनिया भर में अब युद्ध की रणनीति तेजी से बदल रही है। ड्रोन, एआई और रोबोट पहले ही युद्ध का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में जैविक रोबोट अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।

