:: री-यूज्ड कपड़ों से बनी राजवाड़ा की प्रतिकृति रही आकर्षण का केंद्र; आरआरआर थीम हुई स्ट्रीट फैशन वॉक ::
इंदौर । स्वच्छता की वैश्विक राजधानी इंदौर में आज कचरा कतरन नहीं, बल्कि कला के रूप में रैंप पर उतरा। शहर के सबसे जीवंत केंद्र 56 दुकान पर जब मॉडल्स ने रिसाइकिल मटेरियल और पुराने कपड़ों से बने बेहद स्टाइलिश परिधानों में कदम रखे, तो फैशन और पर्यावरण संरक्षण का एक ऐसा संगम दिखा जिसने इंदौर की नवाचारी सोच को नई ऊँचाई दे दी। नगर निगम और फैशन डिजाइनिंग कॉलेज (डीएसआईएफडी) द्वारा रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकिल (आरआरआर थीम) पर आयोजित इस स्ट्रीट फैशन वॉक ने यह साबित कर दिया कि रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी जब हाथ मिलाते हैं, तो ग्लैमर भी जन-जागरूकता का सशक्त माध्यम बन जाता है।
आयोजन का सबसे गौरवशाली क्षण वह था, जब निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, स्वास्थ्य प्रभारी अश्विनी शुक्ल एवं अपर आयुक्त प्रखर सिंह ने री-यूज्ड कपड़ों से निर्मित राजवाड़ा की भव्य प्रतिकृति का लोकार्पण किया। यह कलाकृति इस बात का जीवंत प्रमाण थी कि इंदौर की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक स्वच्छता के सिद्धांत जब मिलते हैं, तो एक कालजयी रचना जन्म लेती है।
अपर आयुक्त प्रखर सिंह ने बताया कि इस फैशन वॉक का उद्देश्य उन कपड़ों को नया जीवन देना था, जिन्हें हम अक्सर वेस्ट मानकर फेंक देते हैं। क्रिश्चयन एमिनेंट कॉलेज और डीएसआईएफडी के युवा डिजाइनरों ने अपनी रचनात्मकता से यह सिद्ध कर दिया कि सही सोच और प्रयास से बेकार कतरनें भी फैशन का नया ट्रेंड बन सकती हैं। रैंप पर उतरे प्रतिभागियों के इनोवेटिव और सस्टेनेबल डिजाइनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
यह केवल एक फैशन शो नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन की झलक थी। बड़ी संख्या में मौजूद युवाओं, छात्रों और शहरवासियों ने न केवल इन नवाचारों की सराहना की, बल्कि इंदौर को पुनः स्वच्छता में देश का नंबर 1 शहर बनाए रखने का सामूहिक संकल्प भी लिया। इस स्ट्रीट वॉक ने संदेश दिया कि फैशन इंडस्ट्री भी समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और सस्टेनेबिलिटी की अलख जगाने में अग्रणी भूमिका निभा सकती है।
रंगीन रोशनियों और पर्यावरण गीतों के बीच आयोजित इस वॉक ने इंदौर की प्रगतिशील सोच को एक नई दिशा प्रदान की, जहाँ हर नागरिक अब कचरे को समस्या नहीं, बल्कि एक संसाधन के रूप में देख रहा है।

