अहमदाबाद । दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जग वसंत नाम का एक विशाल गैस टैंकर (वेसल) रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते गुजरात के कांडला पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंच चुका है। इस जहाज में 42,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी की खेप लाई गई है।
कांडला पोर्ट अथॉरिटी के अनुसार, गैस की इस विशाल खेप को उतारने के लिए मिड-सी ट्रांसफर प्रक्रिया का उपयोग किया जा रहा है। इसका अर्थ है कि समुद्र के बीच में ही जहाज से गैस को सीधे पाइपलाइन सिस्टम या पोर्ट की अन्य तकनीकी सुविधाओं तक पहुंचा दिया जाता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे समय की बचत होती है और गैस को तेजी से मुख्य ग्रिड तक पहुंचाकर आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को तुरंत सक्रिय किया जा सकता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों और आपूर्ति को लेकर अस्थिरता बनी हुई है। भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्हें ईरान ने तनाव के बावजूद होर्मुज के रास्ते का उपयोग करने की विशेष अनुमति दी है। भारत के प्रति इस कूटनीतिक सहयोग का ही परिणाम है कि अब तक चार महत्वपूर्ण तेल और गैस टैंकर सुरक्षित रूप से भारतीय तटों पर उतर चुके हैं।
इससे पहले, 16 मार्च को एमटी शिवालिक मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था, जबकि 17 मार्च को एमटी नंदा देवी ने कांडला में अपनी खेप उतारी थी। इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल से भरा जहाज जग लाडकी और सऊदी क्रूड लेकर आया सिलोंग भी सफलतापूर्वक भारत पहुंच चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जग वसंत से आई इस 42 हजार टन गैस की खेप से देश में घरेलू एलपीजी की उपलब्धता काफी मजबूत होगी। कांडला पोर्ट भारत के ऊर्जा आयात का एक प्रमुख केंद्र है, जहां से गैस देश के विभिन्न हिस्सों में वितरित की जाती है। वैश्विक युद्ध की परिस्थितियों और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद, इस आपूर्ति से देश में रसोई गैस की किल्लत होने की संभावना खत्म हो गई है और आने वाले दिनों में सप्लाई सुचारू बनी रहेगी।

