:: 10 राज्यों के विद्वानों ने साझा किए अनुभव, गुणवत्ता उन्नयन के लिए एमपीपीएससी का विमर्श सत्र संपन्न ::
इन्दौर । मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं प्रशिक्षण कार्यशाला प्रश्नपत्र रचना एवं मूल्यांकन में गुणवत्ता उन्नयन सफलतापूर्वक संपन्न हुई। कार्यशाला के अंतिम दिन देशभर से आए विशेषज्ञों ने परीक्षाओं की शुचिता और प्रश्नपत्रों के निर्माण में बरती जाने वाली सावधानियों पर गहन विमर्श किया। इस आयोजन में देश के 10 अलग-अलग राज्यों के विषय विशेषज्ञों ने सहभागिता कर अपने अनुभव साझा किए।
द्वितीय दिवस का मुख्य आकर्षण विमर्श सत्र रहा, जिसकी अध्यक्षता आयोग के सदस्य नरेंद्र कुमार कोष्टी ने की। इस सत्र के दौरान वाणिज्य, प्रबंधन, वन, दर्शनशास्त्र, आयुर्वेद, प्राणिकी, होम्योपैथी, उद्यमिता, मनोविज्ञान और पशुचिकित्सा जैसे विविध विषयों पर विशेषज्ञों ने तकनीकी प्रस्तुतियां दीं। विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रश्नपत्र निर्माण के समय त्रुटियों को शून्य करने के लिए किन सावधानियों और बारीकियों का ध्यान रखा जाना अनिवार्य है।
तकनीकी सत्र के पश्चात आयोग के उप परीक्षा नियंत्रक गजेंद्र उज्जैनकर के नेतृत्व में एक ओपन सेशन (खुला सत्र) आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने कार्यशाला से प्राप्त अनुभवों पर अपने विचार व्यक्त किए और भविष्य के सुधारों के लिए महत्वपूर्ण फीडबैक दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता आएगी, जिसका सीधा लाभ भविष्य में अभ्यर्थियों को प्राप्त होगा।
समापन समारोह में आयोग के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने विशिष्ट आमंत्रित अतिथियों का सम्मान किया और प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। कार्यक्रम का विधिवत समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। उल्लेखनीय है कि समापन की पूर्व संध्या पर प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली, जहाँ कलाकारों ने पंडवानी, गडूम बाजा और शहनाई वादन की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

