नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा को लेकर संसद में उठे सवालों के बीच सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। राज्यसभा में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद अब्दुल वहाब द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए सरकार ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि भारत को ईरान पर होने वाले सैन्य हमले की पहले से जानकारी थी। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सदन में लिखित जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की 25-26 फरवरी की इजरायल यात्रा के दौरान ऐसी किसी सैन्य कार्रवाई या हमले को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी।
सांसद अब्दुल वहाब ने विदेश मंत्रालय से प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान हुए समझौतों का ब्यौरा मांगा था और साथ ही यह भी पूछा था कि क्या सरकार को यात्रा के अगले ही दिन ईरान पर होने वाले अमेरिकी और इजरायली हमलों का पूर्वानुमान था। विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि इजरायल के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर की गई इस राजकीय यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करना था। इस दौरान दोनों देशों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल भुगतान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा संपन्न होने के ठीक बाद 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान के भीतर कई ठिकानों पर बड़े हमले किए थे, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया। इस संयोग के कारण यह सवाल उठने लगे थे कि क्या रणनीतिक साझेदारी के चलते भारत को इसकी पूर्व सूचना दी गई थी। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय के साथ-साथ इजरायल ने भी इन दावों को गलत बताया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी स्पष्ट किया कि ईरान पर हमले का निर्णय प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के बाद शनिवार तड़के लिया गया था, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता गुरुवार को विफल हो गई थी। सरकार ने दोहराया है कि भारत के इजरायल के साथ संबंध लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक प्रगति के साझा एजेंडे पर आधारित हैं। 2026 के लिए दोनों देशों ने आपसी सहयोग को और गहरा करने का एक व्यापक खाका तैयार किया है। फिलहाल, पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि उसका ध्यान क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय विकास पर केंद्रित है, न कि किसी सैन्य अभियान की पूर्व जानकारी या भागीदारी पर।

