सेंट्रल विस्टा में शिफ्ट हुआ रक्षा मंत्रालय, पुरानी बिल्डिंग बनेगी म्यूजियम

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नई दिल्ली । भारत के सामरिक इतिहास और सैन्य निर्णयों का साक्षी रहा रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक अब अपनी एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। ब्रिटिश वास्तुकार हर्बर्ट बेकर द्वारा 1931 में निर्मित लाल बलुआ पत्थर की यह भव्य इमारत लगभग आठ दशकों तक भारतीय रक्षा मंत्रालय और सैन्य नेतृत्व का अभेद्य केंद्र रही है। 1971 के ऐतिहासिक युद्ध से लेकर हालिया ऑपरेशन सिंदूर तक, इस इमारत के शांत गलियारों ने देश की सुरक्षा से जुड़ी कई गोपनीय योजनाओं और निर्णायक मोड़ को आकार लेते देखा है। अब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत रक्षा मंत्रालय और तीनों सेनाओं के मुख्यालयों को आधुनिक कर्तव्य भवन-2 में स्थानांतरित किया जा रहा है।
यह बदलाव भारतीय सैन्य प्रशासन के इतिहास में एक मील का पत्थर है। 1931 के बाद यह पहली बार है जब रक्षा मंत्रालय और सेना व नौसेना प्रमुखों के कार्यालय साउथ ब्लॉक की सीमाओं से बाहर संचालित होंगे। इस शिफ्टिंग प्रक्रिया में मिलिट्री सेक्रेटरी ब्रांच, एडजुटेंट जनरल ब्रांच और जनसंपर्क विभाग सहित 100 से अधिक महत्वपूर्ण कार्यालय शामिल हैं। वर्तमान में साउथ ब्लॉक के उन गलियारों में, जहां कभी गहरी खामोशी और अनुशासन का राज होता था, अब फाइलों से भरे कार्टन और शिफ्टिंग में जुटे कर्मचारियों की चहल-पहल है। नक्शों, संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और कम्युनिकेशन सिस्टम को बेहद सावधानी से नई बिल्डिंग में ले जाया जा रहा है ताकि दैनिक रणनीतिक कामकाज प्रभावित न हो।
नया पावर सेंटर कर्तव्य भवन-2 अब रक्षा मंत्रालय का प्रशासनिक केंद्र होगा, जहाँ लगभग 225 कमरे आवंटित किए गए हैं। रक्षा मंत्री और उनका सचिवालय पहले ही यहाँ शिफ्ट हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, थल सेना और नौसेना के विशिष्ट दफ्तरों को क्रमशः थल सेना भवन और नौ सेना भवन में स्थानांतरित किया जा रहा है। वह ऐतिहासिक वॉर रूम, जहाँ से महत्वपूर्ण सैन्य ऑपरेशनों की निगरानी की गई थी, उसे भी आधुनिक सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ नई जगह ले जाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि नई तकनीक और आधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस ये परिसर सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करेंगे।
साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को खाली करने के पीछे सरकार का उद्देश्य इन हेरिटेज इमारतों को संरक्षित करना और इन्हें युग युगेन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय के रूप में जनता के लिए खोलना है। हालांकि यह इमारत अब एक संग्रहालय में तब्दील हो जाएगी, लेकिन इसकी दीवारों के भीतर राष्ट्रहित में लिए गए दशकों पुराने फैसले भारतीय सैन्य गौरव की गाथा गाते रहेंगे। यह स्थानांतरण केवल दफ्तरों का बदलाव नहीं है, बल्कि आधुनिक भारत की प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था में एक नई कार्य संस्कृति और युग की शुरुआत का प्रतीक है।