आदि शंकराचार्य के वैश्विक संवाहक बनें युवा, 700 शंकरदूतों ने लिया एकात्मता का संकल्प

धार्मिक मध्य प्रदेश

:: एकात्म पर्व का समापन : ओंकारेश्वर में 2400 करोड़ से आकार ले रहा एकात्म धाम, स्वामी तेजोमयानंद और गौतम भाई पटेल सम्मानित ::
इंदौर/ओंकारेश्वर । भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनरुद्धार और अद्वैत वेदांत के लोकव्यापी प्रसार के संकल्प के साथ ओंकारेश्वर में शंकर प्राकट्योत्सव एकात्म पर्व का मंगलवार को गरिमामय समापन हुआ। जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि एवं चिन्मय मिशन के पूर्व वैश्विक प्रमुख स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती के पावन सानिध्य में आयोजित इस समारोह में देश-विदेश के 700 से अधिक युवाओं को शंकरदूत के रूप में दीक्षित किया गया।
समारोह को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित करते हुए जगद्गुरु श्रृंगेरी शंकराचार्य विधुशेखर भारती ने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे प्रकल्पों की महती आवश्यकता है, जो आदि शंकराचार्य के कालजयी विचारों को वैश्विक स्तर तक पहुँचाएं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आचार्य शंकर ने भारत को सांस्कृतिक सूत्र में पिरोया था, उसी दर्शन को अब विश्व पटल पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत करना युवाओं का उत्तरदायित्व है।
:: ओंकारेश्वर बनेगा एकात्मता का वैश्विक केंद्र ::
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि ओंकारेश्वर की पावन धरा पर ही आचार्य शंकर को गुरु गोविंदपाद मिले और यहीं से अद्वैत की धारा प्रवाहित हुई। मध्यप्रदेश शासन 2400 करोड़ की लागत से ओंकारेश्वर को एकात्मता के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है। यहाँ 108 फीट ऊंची एकात्मता की मूर्ति और अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान की स्थापना का कार्य तीव्र गति से जारी है।
:: सीमाएं तोड़ने का समय : स्वामी अवधेशानंद गिरि
जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने ओजस्वी संबोधन में कहा कि अब भारतीय दर्शन को सीमाओं में बांधकर रखने का समय बीत चुका है। उन्होंने कहा, वेदव्यास ने जिस ज्ञान को व्यवस्थित किया, शंकराचार्य ने उसे पुनर्जीवित किया। अब हमारे शंकरदूतों का दायित्व है कि वे इस अमूल्य निधि को विश्व के प्रत्येक कोने तक पहुँचाएं।
:: 700 युवा बने शंकरदूत, आईआईटीयन्स और डॉक्टर्स भी शामिल ::
नर्मदा तट पर आयोजित दीक्षा समारोह में भारत के 25 राज्यों सहित नेपाल, बांग्लादेश और अमेरिका जैसे देशों के 700 युवाओं ने दीक्षा ली। इन शंकरदूतों में आईआईटी विशेषज्ञ, डॉक्टर्स, सेना के अधिकारी और वैज्ञानिक शामिल हैं, जो अब समाज में एकात्म बोध का प्रसार करेंगे। न्यास के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र मिश्रा ने बताया कि आगामी सिंहस्थ 2028 से पूर्व कलाड़ी से केदारनाथ तक 17 हजार किलोमीटर की विशाल एकात्म यात्रा प्रस्तावित है।
:: विभूतियों का सम्मान ::
इस अवसर पर अद्वैत निष्ठा के लिए स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती और संस्कृत वांग्मय में अतुलनीय योगदान के लिए पद्म भूषण प्रोफेसर गौतम भाई पटेल को सम्मानित किया गया। प्रो. पटेल ने आचार्य शंकर की संपूर्ण कृतियों का पहली बार गुजराती भाषा में अनुवाद करने का ऐतिहासिक संकल्प लिया है। साथ ही श्रृंगेरी शंकराचार्य के पूर्वाश्रम के पितामह-पितामही वेदमूर्ति कुप्पा रामगोपाल वाजपेयया एवं कुप्पा कल्पकाम्बा को भी सम्मानित किया गया।
:: साधना और शांति का मार्ग : स्वामी पूर्णानंद गिरि
समारोह के समापन सत्र में दक्षिणामूर्ति मठ, वाराणसी के प्रमुख स्वामी पूर्णानंद गिरि ने अद्वैत वेदांत के साधना पक्ष को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक संकटों का एकमात्र समाधान भारत का दर्शन है। स्वामिनी सद्विद्यानंद सरस्वती ने सभी सत्रों का सार प्रस्तुत किया। न्यास की आवासी आचार्य माँ पूर्णप्रज्ञा ने आचार्य शंकर के जीवन को त्याग और लोक-कल्याण का सर्वोच्च आदर्श बताया।
:: पत्रकारिता के छात्र हुए पुरस्कृत ::
पंच-दिवसीय एकात्म पर्व के दौरान माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के छात्रों ने प्रतिदिन प्रायोगिक समाचार पत्र का संपादन और प्रकाशन किया। इस रचनात्मक पहल के लिए पत्रकारिता विभाग के छात्रों को मंच से सम्मानित किया गया। समारोह का समापन नर्मदा तट पर गूँजते शिवोहम-शिवोहम के जयघोष और मंगल आरती के साथ हुआ।
:: 17 हजार किमी की एकात्म यात्रा का खाका ::
न्यास के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2027 में केरल के कलाड़ी से केदारनाथ तक 17,000 किलोमीटर की विशाल एकात्म यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा विभिन्न आध्यात्मिक संस्थाओं के सहयोग से सांस्कृतिक एकता का सूत्र पिरोएगी। प्रो. यज्ञेश्वर शास्त्री ने बताया कि न्यास का विजन मानवता को संत्रासों से उबारना है। वर्तमान में 1800 से अधिक शंकरदूत तैयार हो चुके हैं।

अब समय आ गया है कि शंकरदूत केवल भारत तक सीमित न रहें, बल्कि आचार्य शंकर का संदेश लेकर विश्व के प्रत्येक कोने तक पहुँचें।

  • स्वामी अवधेशानंद गिरि

प्रकट न होते श्री शंकर तो, तमस में रहता ज्ञान। उनकी कृपा का भान ही अद्वैत की गहराई है।

  • स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती