ढाका । बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति जनता के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। हालिया पुलिस आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की पहली तिमाही में हत्या की घटनाओं में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 14 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। राजधानी ढाका सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे हिंसक अपराधों ने नागरिकों के बीच असुरक्षा की भावना को गहरा कर दिया है। हाल ही में मोहखाली इलाके में एक डॉक्टर पर हुए चाकू से हमले जैसी घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी अब खुलेआम वार करने से भी नहीं कतरा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंसक अपराधों में यह वृद्धि न केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर जनता के भरोसे को कम करती है, बल्कि सामाजिक स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा है। वैश्विक स्तर पर जारी ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई ने पहले ही आम जनता की कमर तोड़ रखी है, ऐसे में आंतरिक सुरक्षा का गिरता स्तर लोगों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है। रिपोर्टों में इस बात पर जोर दिया गया है कि अपराधियों में कानून का भय समाप्त होता जा रहा है, जिसका मुख्य कारण पुलिस व्यवस्था की कमजोरी, जांच में सुस्ती और न्याय मिलने में होने वाली देरी है। जब तक त्वरित जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक अपराध समाज में सामान्य बात बन जाएंगे और डर लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन जाएगा।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। संसद में निर्दलीय सांसदों ने गृह मंत्री की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद देश में भीड़ तंत्र (मॉब कल्चर) का प्रभाव खत्म नहीं हो रहा है। प्रशासन द्वारा दंडमुक्ति की संस्कृति को समाप्त करने के वादे कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। देश भर में एक के बाद एक हो रहे भीड़ के हमले और हिंसक झड़पें सरकार के दावों की पोल खोल रही हैं।
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के पिछले 18 महीनों के कार्यकाल में भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा की घटनाओं में तेजी आई है। आलोचकों का तर्क है कि वर्तमान शासन व्यवस्था बहाल करने में विफल रहा है, जिससे आपराधिक गिरोहों को पनपने का अवसर मिल रहा है। यह बढ़ता अपराध ग्राफ अब केवल पुलिसिया मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के आर्थिक विकास, सामाजिक सामंजस्य और राष्ट्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। सरकार के लिए यह समय निर्णायक कार्रवाई करने और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बहाल करने का है।

