:: खजराना गणेश मंदिर में नर्मदा चिंतन ज्ञान यज्ञ : आज आएंगे तपोनिष्ठ संत दादागुरु, कल होगा समापन ::
इंदौर । मां नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि समस्त तीर्थों की जननी और अधिष्ठात्री हैं। नर्मदा के पुण्य प्रताप से ही ब्रह्मांड के अन्य तीर्थों का प्राकट्य हुआ है। यदि कोई व्यक्ति जीवनभर लगातार तीर्थ यात्रा करता रहे, तब भी वह नर्मदा तट पर स्थित तीर्थों के दर्शन पूरे नहीं कर सकता, क्योंकि इनकी संख्या 68 करोड़ 73 लाख से भी अधिक है। रेवा तट के कण-कण में बसी इस पावन संस्कृति को समझे बिना भारतीय परंपरा का ज्ञान अधूरा है।
यह दिव्य विचार नर्मदा परिक्रमावासी आचार्य पं. रविकांत शास्त्री ने व्यक्त किए। वे खजराना गणेश मंदिर स्थित सत्संग सभागृह में अ.भा. दादा गुरु परिवार इंदौर नर्मदा मिशन द्वारा आयोजित नर्मदा चिंतन ज्ञान यज्ञ के दौरान शनिवार को श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से मां नर्मदा की महिमा का प्रभावी वर्णन किया। कथा के पूर्व महापौर पुष्यमित्र भार्गव, संयोजक राजेंद्र बंसल, नित्यम बंसल, भागवताचार्य पं. पवन तिवारी और प्रतीक्षा नय्यर (मालवी भाभी) सहित अनेक गणमान्य जनों ने व्यास पीठ एवं नर्मदा पुराण ग्रंथ का पूजन किया।
:: हथिनी नदी के तट पर हुआ था गणेशजी का प्राकट्य ::
आचार्य शास्त्री ने एक रोचक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान गणेश का प्राकट्य भी नर्मदा तट की महिमा से जुड़ा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवती नर्मदा के उबटन की सामग्री से गणेश जी का निर्माण हुआ था। जब शिव गणों ने बालक गणेश का शीश काट दिया, तब मां के क्रोध को शांत करने के लिए शिव गणों ने हथिनी नदी के किनारे एक हाथी के बच्चे का शीश लाकर लगाया था। इस प्रकार नर्मदा के पुण्य प्रताप से ही गणेश जी को नया जीवन मिला। उन्होंने बताया कि खरगोन जिले के शूलपाणी क्षेत्र को लघु कैलाश माना जाता है, जहां स्वयं महादेव तपस्या करते हैं।
:: धोती-कुर्ता पहनकर दादागुरु की अगवानी करेंगे भक्त ::
संयोजक राजेंद्र बंसल ने बताया कि रविवार, 10 मई को शाम 5 बजे देश के सुप्रसिद्ध तपोनिष्ठ संत दादागुरु कथा में सानिध्य प्रदान करने पहुंचेंगे। दादागुरु पिछले 2032 दिनों से केवल नर्मदा जल पर ही आश्रित हैं। उनके स्वागत के लिए भक्तों से सनातनी परंपरा के अनुरूप धोती-कुर्ता पहनकर आने का विशेष आग्रह किया गया है। सोमवार, 11 मई को कथा के समापन पर दादागुरु वृक्ष कलश यात्रा में शामिल महिलाओं को पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देंगे। रविवार को कथा में नर्मदा तट के प्रमुख तीर्थों का वर्णन होगा, वहीं सोमवार को महाप्रसादी के साथ आयोजन संपन्न होगा।

