महापौर का व्यापारी संगठनों के साथ स्वच्छता संवाद; शहर विकास के लिए मिले कई व्यावहारिक सुझाव

इंदौर

:: भविष्य की जरूरतों को देखकर हो रहा काम : नर्मदा के चौथे चरण से वर्ष 2050 तक दूर होगी पेयजल किल्लत, वर्ष 2029 तक पूरा होगा काम ::
इंदौर । स्वच्छता संवाद अभियान के तहत महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शनिवार को शहर के विभिन्न व्यापारी संगठनों और व्यापारिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस महत्वपूर्ण संवाद के दौरान व्यापारियों ने शहर की स्वच्छता, यातायात व्यवस्था, जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, बाजार क्षेत्रों के योजनाबद्ध विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए। खास बात यह रही कि ये सुझाव केवल नगर निगम तक सीमित नहीं थे, बल्कि इनमें पुलिस और आरटीओ सहित विभिन्न विभागों से संबंधित व्यावहारिक समाधान भी शामिल रहे। इस अवसर पर स्वच्छता प्रभारी एवं एमआईसी सदस्य अश्विनी शुक्ला तथा भारत पारख भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक की शुरुआत पिछले साढ़े तीन वर्षों में नगर निगम द्वारा किए गए विकास कार्यों की एक प्रभावशाली वीडियो प्रस्तुति के साथ हुई।
इस आयोजन में शहर के लगभग सभी प्रमुख व्यापारी संगठनों ने हिस्सा लिया। संवाद में मुख्य रूप से इंदौर पेट्रोल डीलर एसोसिएशन, सराफा बाजार एसोसिएशन, सराफा चौपाटी एसोसिएशन, छप्पन दुकान एसोसिएशन, गुरुनानक टिम्बर मार्केट एसोसिएशन, शास्त्री मार्केट व्यापारी संघ, इंदौर रेडीमेड एसोसिएशन, सियागंज व्यापारी एसोसिएशन, पालिका प्लाजा व्यापारी संघ, एमपी टिम्बर एसोसिएशन, नमकीन एवं मिठाई एसोसिएशन और सीतलामाता बाजार एसोसिएशन सहित कई अन्य प्रमुख संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए और अपने विचार रखे।
:: व्यापारियों के अनुभव शहर के लिए बेहद महत्वपूर्ण : महापौर
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि स्वच्छता संवाद के माध्यम से अब तक डॉक्टरों, सीए, वकीलों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों से चर्चा की जा चुकी है। उन्होंने व्यापारी वर्ग के सुझावों को अमूल्य बताते हुए कहा कि व्यापारी देश-दुनिया का भ्रमण करते हैं, इसलिए वे इंदौर और अन्य शहरों के अनुभवों की तुलना कर सबसे व्यावहारिक सुझाव देते हैं। महापौर ने जोर देकर कहा कि नगर निगम जन्म से लेकर मृत्यु तक नागरिक जीवन से जुड़े अधिकांश कार्यों का संचालन करता है। इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में अपना एक अलग और अनूठा मॉडल विकसित किया है, और अब हमारा पूरा ध्यान सुशासन, मजबूत आधारभूत ढांचे तथा दीर्घकालिक विकास पर है।
:: 2050 की आबादी को ध्यान में रखकर बन रही योजनाएं ::
शहर के भविष्य के रोडमैप पर बात करते हुए महापौर ने बताया कि इंदौर की तेजी से बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए नर्मदा नदी के चौथे चरण की जल परियोजना पर तेजी से कार्य जारी है। इस महापरियोजना के जरिए वर्ष 2050 तक की पेयजल आवश्यकताओं को आसानी से पूरा किया जा सकेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना वर्ष 2029 तक पूरी तरह संपन्न हो जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम केवल वर्तमान समस्याओं के तात्कालिक समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इंदौर को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और टिकाऊ (सस्टेनेबल) शहर के रूप में विकसित करने के लिए दूरगामी कार्य कर रहा है। संवाद के अंत में महापौर ने व्यापारियों द्वारा उठाए गए विभिन्न सवालों और उनके सुझावों पर बिंदुवार विस्तार से चर्चा की।