:: निर्यातकों को उपलब्ध कराई जाएंगी बेहतर सुविधाएं और प्रोत्साहन योजनाएं, संयुक्त बैठक में रणनीति पर लगी मुहर ::
इंदौर । इंदौर प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक एवं व्यापारिक केंद्र है और यहाँ निर्मित उत्पादों की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप है। स्थानीय उद्यमियों और निर्यातकों को बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराकर जिले को एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। यह बात कलेक्टर शिवम वर्मा ने सोमवार को जिला स्तरीय लघु उद्योग संवर्धन बोर्ड, जिला स्तरीय निर्यात संवर्धन समिति (डीईपीसी) एवं निवेश प्रोत्साहन केंद्र की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
बैठक में सेज (एसईझेड) कमिश्नर अभिषेक शर्मा, एमपीआईडीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिमांशु प्रजापति सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, उद्योगपति और निवेशक उपस्थित रहे। यह बैठक भारत सरकार के विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा डिस्ट्रिक्ट्स एज़ एक्सपोर्ट हब्स (डीईएच) पहल के अंतर्गत आयोजित की गई। इंदौर, मध्य प्रदेश के उन पाँच जिलों में शामिल है जिन्हें डीईएच राष्ट्रीय अभियान के प्रथम चरण में चुना गया है, जो जून 2026 से देशभर के 120 प्राथमिकता जिलों में लागू होगा।
बैठक में बताया गया कि इंदौर जिले से फार्मा उत्पाद, प्याज, सोयाबीन सहित विभिन्न कृषि एवं औद्योगिक उत्पादों के निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं। निर्यातकों को आवश्यक अनुमति, मार्गदर्शन तथा शासन की योजनाओं का लाभ समय-सीमा में उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही मध्य प्रदेश निर्यात संवर्धन योजना-2025 और अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन योजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में ईसीजीसी, एक्जिम बैंक, नाबार्ड, इंडिया पोस्ट तथा फार्मेक्सिल, एपीडा जैसी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स सहित उद्योग संघों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

