वक्त संभलने का है, देश का युवा मौजूदा सिस्टम से खफा

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कॉकरोच जनता पार्टी के बढ़ते फॉलोअर्स पर थरुर की दो टूक
नई दिल्ली । देश की राजनीति में इन दिनों एक अजीब और अनोखे नाम ने सोशल मीडिया पर भारी हलचल मचा रखी है। यह नाम है कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी। भले ही यह कोई पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं है और न ही इसके पास कोई चुनावी मशीनरी या जमीनी संगठन है, लेकिन डिजिटल दुनिया में इसका असर इतना व्यापक हो चुका है कि इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में इसने कई स्थापित बड़े दलों को भी पीछे छोड़ दिया है। अब इस पूरे अनोखे और व्यंग्यात्मक ऑनलाइन मूवमेंट पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। थरूर ने स्पष्ट किया है कि इसे सिर्फ एक वायरल मजाक या इंटरनेट ट्रेंड मानकर खारिज नहीं किया जा सकता, बल्कि यह देश के युवाओं की व्यवस्था के प्रति गहरी नाराजगी और सिस्टम से बढ़ती दूरी का एक बड़ा और गंभीर संकेत है।
थरूर ने एक विशेष इंटरव्यू के दौरान युवाओं के इस गुस्से और निराशा के मुख्य कारणों को रेखांकित किया। उनके अनुसार, हाल ही में हुए नीट पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी, बेकाबू महंगाई और युवाओं के सामने अवसरों की भारी कमी ने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। यही वजह है कि एक सोशल मीडिया आधारित व्यंग्यात्मक अभियान अचानक देश के करोड़ों युवाओं की आवाज बनकर उभर आया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जब लोगों को अपनी बात रखने के सही मंच नहीं मिलते, तो वे नए रास्ते तलाशते हैं और सीजेपी उसी संचित गुस्से का एक डिजिटल विस्फोट है।
नीट पेपर लीक विवाद को उन्होंने युवाओं के धैर्य को तोड़ने वाला ‘आखिरी झटका’बताया। लाखों छात्र अपने भविष्य को संवारने के लिए सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं, उनके परिवार कर्ज के जाल में डूब जाते हैं और अंत में जब पूरी परीक्षा व्यवस्था ही सवालों के घेरे में आ जाती है, तो यह छात्रों के लिए मानसिक रूप से बेहद विनाशकारी साबित होता है। इस अव्यवस्था के चलते कई छात्रों को मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है। इस पृष्ठभूमि में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लगे कुछ प्रतिबंधों को भी गलत ठहराया और कहा कि लोकतंत्र में असहमति, रचनात्मक आलोचना और व्यंग्य को पूरी जगह मिलनी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि युवाओं की यह निराशा केवल मौजूदा सरकार से नहीं बल्कि पूरे राजनीतिक ढांचे से है। हाल के क्षेत्रीय चुनावों का उदाहरण देते हुए उन्होंने इसे नई पीढ़ी यानी जेन-जी की जीत बताया, जो अब पारंपरिक राजनीति से हटकर नए विकल्प तलाश रही है। अंत में उन्होंने मुख्यधारा के राजनीतिक दलों और विपक्ष को सलाह दी कि वे युवाओं की इस बेचैनी और उनकी भाषा को समझें, अन्यथा ऐसे डिजिटल मूवमेंट और मजबूत होंगे जो भविष्य में मतदान के रुख को पूरी तरह बदलने की ताकत रखते हैं।