:: निगम की अनूठी शुरुआत : प्रतिदिन 1 टन कचरे की होगी वैज्ञानिक रीसाइक्लिंग, पीवीसी जाएगा दिल्ली और कॉटन से स्थानीय स्तर पर बढ़ेगा रोजगार ::
इंदौर । स्वच्छता में नित नए कीर्तिमान रचने वाले इंदौर के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में देश को नई राह दिखाते हुए इंदौर नगर निगम ने पुराने फ्लेक्स और बैनरों के निपटान के लिए अनूठी फ्लेक्स-बैनर वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट का संचालन शुरू कर दिया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव एवं निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देशों के बाद शुरू हुई इस कवायद से अब शहर की सड़कों और चौराहों से निकलने वाला यह प्लास्टिक कचरा पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। निगम द्वारा यह अभिनव पहल “स्वच्छ इंदौर–ग्रीन इंदौर” अभियान के तहत की गई है।
अक्सर देखा जाता है कि राजनीतिक रैलियों, विज्ञापनों और त्योहारों के बाद भारी मात्रा में होर्डिंग्स और फ्लेक्स कचरे के ढेर में तब्दील हो जाते हैं। प्लास्टिक और सिंथेटिक होने के कारण इन्हें नष्ट करना एक बड़ी चुनौती था। अब इस यूनिट के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 1 टन क्षमता वाले फ्लेक्स-बैनर कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उसका पुनचक्रण किया जाएगा। यह आधुनिक मशीन इस कचरे से 50 फीसदी पीवीसी (प्लास्टिक) और 50 फीसदी कॉटन फाइबर को पूरी तरह से अलग-अलग कर देती है।
इस यूनिट से निकलने वाले दोनों घटकों का शत-प्रतिशत सदुपयोग सुनिश्चित किया गया है। इसमें से बैनर से अलग की गई आधी पीवीसी सामग्री को रीसाइक्लिंग के लिए दिल्ली भेजा जाएगा। वहीं, बैनर के पीछे लगे शेष आधे कॉटन फाइबर का उपयोग इंदौर में ही रस्सी निर्माण के लिए किया जाएगा जिससे स्थानीय कुटीर उद्योग को सीधा फायदा पहुंचेगा। निगम अधिकारियों के मुताबिक इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ट्रेंचिंग ग्राउंड पर पहुंचने वाले सूखे कचरे की मात्रा में भारी कमी आएगी। यह पूरा प्रोजेक्ट वेस्ट टू वेल्थ और सर्कुलर इकॉनमी का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है, जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।


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