ममता के गढ़ और रसूखदार नेताओं को हराने वालों को मिली सुवेंदु कैबिनेट में जगह

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सुवेंदु ने मिशन सोनार बांग्ला की ओर बढ़ा दिए कदम
कोलकाता । सोमवार को पश्चिम बंगाल की सियासत में एक नया और बेहद महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपनी कैबिनेट का पहला विस्तार किया। कोलकाता के राजभवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 35 विधायकों ने मंत्री पद की गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल आर.एन. रवि ने सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार के साथ, सीएम सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के गढ़ों को भेदने वाले अपने सबसे भरोसेमंद और आक्रामक चेहरों को सरकार की कमान सौंपी है, जो एक स्पष्ट संदेश है कि नई सरकार विकासोन्मुखी और मुखर रहेगी।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1ए) के तहत, किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। इस संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, पश्चिम बंगाल में अधिकतम 44 मंत्री हो सकते हैं। सोमवार को 35 मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद, सुवेंदु कैबिनेट ने अब अपना महत्वपूर्ण आकार ले लिया है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ युवा और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों (एमओएस) को भी प्राथमिकता दी गई है, जिसमें राजेश महता, इंद्रनील खान और मालती रावा रॉय जैसे नाम शामिल हैं। सुवेंदु कैबिनेट विस्तार की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें उन चेहरों को पुरस्कृत किया गया है जिन्होंने हाल के चुनावों में ममता की तृणमूल कांग्रेस के बड़े किलों और रसूखदार नेताओं को भारी अंतर से परास्त किया था। अर्जुन सिंह, तापस रॉय, स्वपन दासगुप्ता, शंकर घोष और पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा जैसे कद्दावर नेताओं को कैबिनेट में जगह देकर मुख्यमंत्री सुवेंदु ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार आक्रामक और लोक-केंद्रित एजेंडा पर चलेगी। यह फेरबदल न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने का प्रयास है, बल्कि भाजपा के जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने की रणनीति का भी हिस्सा है।
कुल 35 मंत्रियों ने शपथ ली, जिसमें 23 प्रमुख मंत्रियों की एक प्रभावशाली सूची है। फलाकाटा से दीपक बर्मन, मानिकतला से तापस रॉय, सिलीगुड़ी से शंकर घोष, और राशबिहारी से स्वपन दासगुप्ता जैसे दिग्गज इसमें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, तुफानगंज से मालती रावा रॉय, गोपीबल्लभपुर से राजेश महता और बेहाला पश्चिम से इंद्रनील खान जैसे युवा चेहरों को स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री के तौर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा (मोयना से) और नोआपारा से अर्जुन सिंह जैसे वे नेता जिन्होंने टीएमसी के गढ़ों में जीत दर्ज की, इस नई टीम का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं, जो राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक नए दौर का संकेत है।
मिशन सोनार बांग्ला की ओर बढ़े कदम
शपथ ग्रहण के ठीक बाद मुख्यमंत्री अधिकारी ने कैबिनेट के सभी नए सहयोगियों को बधाई दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नए मंत्रिमंडल में भौगोलिक और सामाजिक समीकरणों (उत्तर बंगाल, जंगलमहल, एससी/एसटी बेल्ट और शहरी क्षेत्रों) का विशेष ध्यान रखा गया है। टीएमसी के हिंसक विरोध और गढ़ों को तोड़कर आए इन 35 मंत्रियों के कंधों पर अब बंगाल को नए प्रशासनिक ऊंचाइयों पर ले जाने और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने की एक बड़ी और खौफनाक चुनौती होगी।