नीट पेपर लीक के खिलाफ कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी अभियान ‘छात्रों की गूंज’ शुरू

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अहमदाबाद से हुआ आगाज़, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग
अहमदाबाद | देशभर में नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। अहमदाबाद में आयोजित छात्रों की गूंज अभियान के शुभारंभ अवसर पर महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री एवं विधायक सतेज पाटिल, अहमदाबाद शहर संयोजक शेष नारायण ओझा तथा गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के मीडिया कन्वीनर एवं प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
पूर्व मंत्री एवं विधायक सतेज पाटिल ने कहा कि भाजपा सरकार की भ्रष्ट नीतियों के कारण देश के लाखों विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे तथा पेपर लीक माफिया के साथ उनके संभावित संबंधों की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने देशभर में 40 दिनों का राष्ट्रव्यापी छात्रों की गूंज अभियान प्रारंभ किया है। यह अभियान देश के 28 प्रमुख शहरों में छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों, कोचिंग संस्थानों, कॉलेज परिसरों, पुस्तकालयों और युवा समूहों के बीच चलाया जाएगा।
सतेज पाटिल ने कहा कि यह अभियान उन लाखों छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों की आवाज है, जिनकी वर्षों की मेहनत बार-बार पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने, परिणामों में देरी, भर्ती प्रक्रिया ठप होने तथा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की विफलताओं के कारण बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि छात्र किसी प्रकार का उपकार नहीं मांग रहे हैं, बल्कि केवल निष्पक्ष परीक्षा और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट-यूजी 2026 ने परीक्षा प्रणाली पर जनता के विश्वास का संकट और गहरा कर दिया है। भाजपा सरकार ने पारदर्शिता और सुधार के नाम पर एनटीए का गठन किया था, लेकिन आज यह संस्था करोड़ों छात्रों के लिए नेशनल ट्रॉमा एजेंसी बन चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्षों में देशभर में 89 से अधिक पेपर लीक और परीक्षा घोटाले सामने आए, लेकिन आज तक किसी बड़े मास्टरमाइंड, राजनीतिक संरक्षण देने वाले व्यक्ति या पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश नहीं हुआ। केवल छोटे दलाल और बिचौलिए पकड़े गए, जबकि असली सरगना और उन्हें संरक्षण देने वाले लोग बचते रहे।
सतेज पाटिल ने कहा कि नीट-यूजी 2026 का कथित पेपर लीक इस सड़ी-गली व्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण है। लाखों छात्रों ने वर्षों तक मेहनत की और करोड़ों परिवारों ने अपनी जीवनभर की कमाई बच्चों की पढ़ाई पर खर्च की, लेकिन पूरी परीक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद देशभर में 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या कर ली। कई छात्रों ने अपने सुसाइड नोट में व्यवस्था से निराशा और भविष्य को लेकर अंधकार की भावना व्यक्त की। इसके बावजूद शिक्षा मंत्री ने न तो नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दिया और न ही कोई ठोस कदम उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं स्वीकार किया कि छात्रों की आत्महत्याओं के लिए व्यवस्था जिम्मेदार है। यदि जिम्मेदारी स्वीकार की गई है, तो फिर इस्तीफा क्यों नहीं दिया जा रहा है? यदि लाखों छात्रों का भविष्य और 20 से अधिक छात्रों की मौत भी किसी मंत्री को पद छोड़ने के लिए बाध्य नहीं करती, तो जवाबदेही का क्या अर्थ रह जाता है?
सतेज पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब छात्र सड़कों पर हैं, परिवार टूट रहे हैं और परीक्षा व्यवस्था मजाक बन चुकी है, तब प्रधानमंत्री द्वारा इस विषय पर मौन रहना यह दर्शाता है कि युवाओं की पीड़ा सरकार की प्राथमिकता नहीं है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल नीट की नहीं बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है। पेपर लीक, भर्ती घोटाले, रिक्त पद, महंगी कोचिंग व्यवस्था, बार-बार स्थगित होती परीक्षाएं और बढ़ती बेरोजगारी ने युवाओं का विश्वास पूरी तरह तोड़ दिया है।
इस अवसर पर अहमदाबाद शहर संयोजक शेष नारायण ओझा ने कहा कि देश में पिछले दस वर्षों में 89 पेपर लीक मामलों से कम से कम 6.5 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। इनमें लगभग 48 परीक्षाओं की दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी, जबकि 22 परीक्षाएं आयोजित होने से पहले ही रद्द कर दी गईं। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2019 के बाद, नीट-2024 को छोड़कर, कम से कम 64 बड़ी परीक्षाएं पेपर लीक के आरोपों से प्रभावित हुईं, जिनके मामले 19 राज्यों तक फैले हुए हैं। इनमें 45 सरकारी भर्ती परीक्षाएं शामिल थीं तथा कम से कम 27 परीक्षाएं रद्द अथवा स्थगित करनी पड़ीं।
शेष नारायण ओझा ने आरोप लगाया कि पेपर लीक अब कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है, जिसमें वेंडर एजेंसियां, प्रिंटिंग प्रेस, परिवहन श्रृंखला, परीक्षा केंद्र, अंदरूनी कर्मचारी, बिचौलिए और सॉल्वर गैंग की भूमिका बार-बार सामने आती रही है। उन्होंने मांग की कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, पेपर लीक माफिया, वेंडर एजेंसियों, अधिकारियों तथा राजनीतिक संरक्षण देने वालों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा एनटीए, प्रश्नपत्र निर्माण, प्रिंटिंग, परिवहन, परीक्षा केंद्रों, डिजिटल सिस्टम और वेंडर अनुबंधों सहित पूरी परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किया जाए।
साथ ही उन्होंने प्रत्येक वर्ष पूर्व निर्धारित परीक्षा एवं भर्ती कैलेंडर लागू करने, परीक्षा तिथि, परिणाम तिथि और नियुक्ति की समय-सीमा पहले से घोषित करने तथा उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने बताया कि 30 जून से देश के 28 शहरों में पर्चा वितरण, नुक्कड़ सभाएं और छात्र संपर्क अभियान चलाया जाएगा। जुलाई माह में साप्ताहिक कार्यक्रम, कैंपस संपर्क अभियान तथा आंबेडकर संवाद आयोजित होंगे। 1 अगस्त 2026 को सभी 28 शहरों में जिला कलेक्टर कार्यालयों का घेराव किया जाएगा, जबकि 9 अगस्त 2026 को दिल्ली चलो कार्यक्रम के साथ अभियान के प्रथम चरण का समापन होगा, जिसमें देशभर के छात्र अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाएंगे।
कांग्रेस पार्टी ने देशभर के विद्यार्थियों से इस अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए मिस्ड कॉल नंबर 9873036161 जारी किया है। साथ ही छात्रों से www.chhatronkigoonj.in पर पंजीकरण कर अभियान से जुड़ने का आह्वान किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि यह केवल राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और उनके सपनों को बचाने का छात्र आंदोलन है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के मीडिया कन्वीनर एवं प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने कहा कि गुजरात की शिक्षा व्यवस्था को भाजपा सरकार ने गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में 40 हजार से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं तथा लगभग 3 हजार सरकारी स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं।
डॉ. दोशी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने देश के बच्चों को मुफ्त शिक्षा और शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रदान किया था, जबकि वर्तमान केंद्र और गुजरात की भाजपा सरकार शिक्षकों के अधिकारों को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा सेवा का क्षेत्र है, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे बड़े पैमाने पर लूट और वसूली का माध्यम बना दिया है, जो देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है।