क्या औरत का अपना कोई घर नहीं होता? ‘

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‘अपना घर’ औरत के लिए सच में क्या मायने रखता है? शो ‘अनुपमा’ बार बार उन मुद्दों पर बात करता है जो महिलाओं के दिल के बेहद करीब हैं। अब अपने नए ‘अपना घर’ ट्रैक के साथ यह शो पारिवारिक ड्रामे से आगे बढ़कर एक ऐसा सवाल उठाता है जो जितना भावनात्मक है उतना ही अहम: “हमारा अपना घर कौन सा है?”यह ट्रैक उस पुरानी सोच को चुनौती देता है जिसमें औरतों से उम्मीद की जाती है कि वे सबके लिए घर बसाएँ, लेकिन उन्हें खुद अपना घर बनाने के लिए कभी मज़बूती से प्रोत्साहित नहीं किया जाता। ‘इस ट्रैक पर अपनी राय रखते हुए रूपाली गांगुली उर्फ अनुपमा ने ‘औरतों का अपना घर’ पर एक महत्त्वपूर्ण सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “सालों तक अनुपमा ने परिवारों को जोड़कर रखने में अपनी ज़िंदगी लगा दी, लेकिन इस बार वह वही सवाल पूछती है जो शायद लाखों औरतों ने कभी न कभी खुद से पूछा होगा, ‘हमारा अपना घर कौन सा है?’ मेरा मानना है कि हर औरत को वह आत्मविश्वास और सुरक्षा मिलनी चाहिए जो एक ऐसे स्पेस से आती है जिसे वह सच में अपना कह सके।