यूडाइस प्लस की रिपोर्ट से हुए खुलासे से शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
नई दिल्ली । देश में स्कूलों की संख्या लगातार घट रही है। शिक्षा मंत्रालय की यूडाइस प्लस (यूडीआईएसई+) 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार बीते एक वर्ष में देशभर में 4,791 स्कूल बंद हो गए, यानी औसतन हर दिन 13 स्कूलों का संचालन बंद हो गया। वर्ष 2024-25 में देश में कुल 14,71,473 स्कूल थे, जो 2025-26 में घटकर 14,66,682 रह गए। सबसे अधिक 2,426 स्कूल मध्य प्रदेश में बंद हुए, जबकि तेलंगाना में 1,392, पश्चिम बंगाल में 568, आंध्र प्रदेश में 474, तमिलनाडु में 369, कर्नाटक में 281 और हिमाचल प्रदेश में 266 स्कूल बंद हुए।
इस संबंध में शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है, कि कई राज्यों में छोटे स्कूलों का बड़े विद्यालयों में विलय किया जा रहा है, जिसके कारण स्कूलों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। हालांकि कुछ राज्यों में नए स्कूल खुले हैं, लेकिन वहां भी छात्रों के नामांकन में गिरावट चिंता का विषय बनी हुई है। बिहार में 946 नए स्कूल जुड़े, इसके बावजूद छात्र नामांकन में 4.37 लाख की कमी दर्ज की गई। इसी तरह छत्तीसगढ़ में 234 और दिल्ली में 87 नए स्कूल बढ़े, लेकिन दोनों राज्यों में भी नामांकन घटा है।
बिना एनरोलमेंट वाले स्कूल घटे
ताजा रिपोर्ट में यह भी सामने आया, कि देश में पहली बार जीरो एनरोलमेंट यानी बिना छात्रों वाले स्कूलों की संख्या घटी है। ऐसे स्कूलों की संख्या 7,993 से घटकर 5,663 रह गई है। हालांकि इन स्कूलों में अब भी 20,667 शिक्षक कार्यरत हैं, जिससे संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर सवाल उठ रहे हैं।
इन राज्यों में बिना छात्र वाले स्कूलों की संख्या बढ़ी
पश्चिम बंगाल में स्थिति इसके विपरीत है। वहां बिना छात्रों वाले स्कूलों की संख्या बढ़कर 4,133 हो गई है, जिनमें 19,502 शिक्षक तैनात हैं। उत्तर प्रदेश में भी ऐसे स्कूल 81 से बढ़कर 313 हो गए हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में पहली बार 149 जीरो एनरोलमेंट स्कूल दर्ज किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या राष्ट्रीय स्तर पर घटकर 1,00,843 रह गई है, जो पिछले वर्ष 1,04,125 थी। हालांकि आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, झारखंड, बिहार और अन्य राज्यों में ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़ी है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्कूलों की संख्या बढ़ाना या घटाना समाधान नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षकों की नियुक्ति छात्रों की वास्तविक संख्या के अनुरूप हो। जिन विद्यालयों में छात्र नहीं हैं, वहां से शिक्षकों का स्थानांतरण उन स्कूलों में किया जाना चाहिए जहां शिक्षकों की कमी है। इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और संतुलित बन सकेगी।

