माइक्रो ग्रीन्स : सेहत का बड़ा ख़ज़ाना

रसोई की खिड़की में भी पूरे परिवार की सेहत के लिए बनाए माइक्रो ग्रीन्स का बगीचा
इंदौर आज हर कोई अच्छे स्वास्थ के लिए अच्छी दिनचर्या, अच्छा व्यायाम और शुद्ध पौष्टिक भोजन की तलाश में है। माइक्रो ग्रीन्स स्वास्थ्य जगत में नया और बेहद उपयोगी उपहार बनकर सामने आए हैं। आकार में नन्हे-से ये पौधे पोषण से भरपूर होते हैं। इन्हें देखकर शायद पहली नज़र में कोई विशेष बात महसूस न हो, लेकिन यही छोटी-छोटी कोमल पत्तियाँ विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सीडेंट और ऊर्जा का ऐसा खज़ाना समेटे होती हैं कि इन्हें ‘सुपरफूड’ की श्रेणी में रखा जाता है। आहार और पोषण विशेषज्ञ डॉ पूनम विशाल ज्वेल ने बताया किइनकी खासियत यह है कि इन्हें उगाने के लिए न बड़े खेत की ज़रूरत है और न ही किसी विशेष तकनीक की। आपकी बालकनी, छत, रसोई की खिड़की या धूप वाला कोई छोटा-सा कोना भी पर्याप्त है।
क्या हैं माइक्रोग्रीन्स ?
जब किसी सब्ज़ी, अनाज या दाल के बीज अंकुरित हो जाते है और उनमें दो से चार कोमल पत्तियाँ निकाल आती हैं, तब उन्हें माइक्रोग्रीन्स कहा जाता है। सामान्यतः इन्हें 7 से 21 दिनों के भीतर काटकर खाया जाता है। यह अंकुरित अनाज से अलग होते हैं, क्योंकि इनमें पौधे का तना और पत्तियाँ खाई जाती हैं, जबकि जड़ को नहीं खाया जाता।
इन बीजों से तैयार करें ?
घर में उपलब्ध अनेक बीजों से स्वादिष्ट और पौष्टिक माइक्रो ग्रीन्स उगाए जा सकते हैं। जैसे मेथी ,सरसों, मूली,धनिया, पालक, चना, मटर, गेहूँ, सूरजमुखी के बीज, ब्रोकली, लाल पत्तागोभी, चुकंदर, अल्फाल्फा, तुलसी, अरुगुला, सरसों, चिया , अलसी आदि।
हर माइक्रोग्रीन का स्वाद और पोषण थोड़ा अलग होता है। उदाहरण के लिए मेथी हल्की कड़वाहट लिए होती है, मूली में तीखापन होता है, जबकि मटर और सूरजमुखी के माइक्रोग्रीन्स हल्के मीठे स्वाद के कारण बच्चों को भी पसंद आते हैं।
घर में ऐसे उगाएं
एक ट्रे, गमला या चौड़ा डिब्बा लें। उसमें जैविक मिट्टी या कोकोपीट भर दें। बीजों को कुछ घंटों तक भिगोकर रखें फिर समान रूप से फैला दें और हल्का पानी छिड़कें। रोज़ थोड़ा-सा पानी देते रहें। लगभग एक सप्ताह बाद हरी-हरी कोमल पत्तियाँ निकलने लगेंगी। 7 से 21 दिनों के बीच इन्हें कैंची से काटकर उपयोग किया जा सकता है।
माइक्रोग्रीन्स केवल देखने में सुंदर नहीं होते, बल्कि पोषण का सघन स्रोत भी हैं। इनमें विटामिन A, C, E और K भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। साथ ही आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे आवश्यक खनिज भी मिलते हैं।
इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को फ्री-रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं। त्वचा को सुंदर बनाने में सहायक होते है, इसके नियमित प्रयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं, पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं, हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं, त्वचा में प्राकृतिक चमक और बालों के स्वास्थ्य को समर्थन देते हैं, वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए अच्छे विकल्प हैं, मधुमेह और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं में संतुलित आहार का हिस्सा बन सकते हैं।
हर उम्र के व्यक्ति के लिए लाभकारी
आजकल बच्चों की थाली में हरी सब्ज़ियाँ शामिल कराना कई माता-पिता के लिए चुनौती बन गया है। ऐसे में माइक्रो ग्रीन्स एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। इसको बनाने में बच्चों को भी करें शामिल , जिससे उन्हें नए पनपते कोमल पत्तों से बने व्यंजन खाने में रुचि बनी रहेगी। इन्हें सैंडविच, पराठे, सूप, चीला या पिज़्ज़ा में मिलाकर आसानी से खिलाया जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं, खिलाड़ियों, व्यायाम करने वालों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी ये पोषण बढ़ाने का सरल माध्यम हो सकते हैं।
इनका उपयोग बिना अधिक पकाए किया जाता है, ताकि पोषक तत्व सुरक्षित रहें। इनसे आप बहुत कुछ बना सकते हैं जैसे हेल्दी सलाद,सैंडविच और रैप,अंकुरित चाट, पोहा और उपमा में इसे मिलाए, मूंग दाल या बेसन का चीला बनाते समय इसमें करे प्रयोग, दही या रायता बनाते समय उसने करें प्रयोग, हरी चटनी में धनिया पुदीना के साथ ,सूप की गार्निश में, मिक्स वेजिटेबल दलिया में, स्मूदी, पनीर भुर्जी, अन्य कोई सब्जी में, पराठे की स्टफिंग में, पास्ता और नूडल्स में, पिज़्ज़ा टॉपिंग में करें शामिल।
छोटी-सी सावधानियाँ
हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों का ही उपयोग करें। ट्रे और मिट्टी को साफ़ रखें तथा फफूंदी लगने पर माइक्रोग्रीन्स का सेवन न करें। काटने के बाद इन्हें साफ़ पानी से धोकर तुरंत उपयोग करना बेहतर रहता है।
हर घर में उगे एक सेहत का कोना
आज जब बाज़ार की सब्ज़ियों में रसायनों की चिंता बढ़ रही है, ऐसे समय में घर पर उगाए गए माइक्रोग्रीन्स एक भरोसेमंद विकल्प बन सकते हैं। इन्हें उगाने में कम समय, कम जगह और कम खर्च लगता है, लेकिन लाभ पूरे परिवार को मिलता है। इस मौसम में अपने घर के किसी छोटे-से कोने को हरियाली से भर दें। हो सकता है वही नन्ही-सी ट्रे आपके परिवार की सेहत का सबसे बड़ा निवेश साबित हो।सेहत हमेशा बड़े बदलावों से नहीं, छोटी-छोटी अच्छी आदतों से बनती है। माइक्रोग्रीन्स ऐसी ही एक छोटी आदत हैं, जो आपके जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती है।

