गौशाला में पानी के बिना तड़पने को मजबूर 100 गौमाता
नदी से पाइपलाइन होने के बावजूद बूंद-बूंद पानी को तरस रहे गोवंश
खराब और मोटा चारा डालने का भी आरोप
महिदपुर। एक तरफ सरकार गौ संरक्षण के लिए लाखों-करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है,वहीं दूसरी तरफ महिदपुर विधानसभा के ग्राम बलाई खेड़ा में जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखने को मिली है।यहाँ स्थित शासकीय गौशाला में प्रशासनिक लापरवाही के चलते लगभग 100 गौमाता पानी और चारे के अभाव में दम तोड़ने की कगार पर पहुँच गई हैं। ग्राम बलाईखेड़ा के आक्रोशित ग्रामीणों ने बताया कि गौशाला में बनी पानी की ठेल पूरी तरह सूखी पड़ी है,उसमें पानी की एक बूंद तक मौजूद नहीं है।भीषण गर्मी और प्यास से बेहाल गौवंश को तड़पता देख,अब ग्रामीण खुद आगे आए हैं।ग्रामीण अपने स्तर पर निजी कुप्पों से पानी लाकर गौमाता की प्यास बुझाने को मजबूर हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि नदी से लेकर गौशाला तक पानी की बाकायदा पाइपलाइन बिछी हुई है। इसके बावजूद सरपंच और सचिव अपनी मनमानी पर उतारू हैं और मोटर चालू करके पानी की व्यवस्था नहीं कर रहे हैं।100 से अधिक गोवंश को गौशाला में बंद तो कर दिया गया है लेकिन उनकी सुध लेने वाला या देखभाल करने वाला कोई नहीं है।ग्रामीणों ने बताया कि जब इस बदहाली को लेकर सरपंच को कई बार अवगत कराया गया तो उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगी।लगातार शिकायत करने पर सरपंच ने गौशाला में सूखा चारा (सुकला) तो डलवा दिया लेकिन वह इतना मोटा और घटिया स्तर का है कि गौमाता उसे खा भी नहीं पा रही हैं।सरपंच और सचिव की इस तानाशाही और बेरुखी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस मामले में तुरंत संज्ञान लिया जाए।बेजुबान पशुओं के लिए पानी-चारे की सुचारू व्यवस्था की जाए और लापरवाह सरपंच-सचिव के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

