सिर्फ चार दिन के सत्र में जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा की उम्मीद कम: मायावती

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। चढ़ावा चोरी और पेपर लीक जैसे छात्रों के मुद्दों के कारण यह सत्र हंगामेदार रहेगा। इस दौरान एक तरफ योगी सरकार अपने साढ़े 9 साल के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड पेश करेगी, तो विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए सवालों की लंबी सूची तैयार कर की है, लेकिन इसी बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने सरकार को घेरा है, साथ ही उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाए हैं।
यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू हो गया। 4 अगस्त को सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी। मायावती ने कहा कि सिर्फ चार दिन का सत्र होने से जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा की उम्मीद कम है। संसद की तरह यूपी विधानसभा भी दलगत राजनीति, हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप की भेंट न चढ़े, इसकी अपेक्षा जताई। मायावती ने कहा कि अफसरशाही को संविधान और जनहित के प्रति जवाबदेह बनाए रखने के लिए विधायिका का प्रभाव मजबूत रहना जरूरी है। सवाल उठाया कि इतने छोटे सत्र में विधानसभा अपना वास्तविक उद्देश्य पूरा कर पाएगी या यह केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की मजबूती के लिए सरकार और विपक्ष, दोनों का गंभीर संसदीय आचरण जरूरी है।
बता दें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वित्त मंत्री 4 अगस्त को अनुपूरक बजट पेश करेंगे। इसके अगले दिन अन्य विधायी कार्यों को निपटाया जाएगा, और 6 अगस्त को अनुपूरक बजट पर विस्तृत चर्चा के बाद सरकार इसे पास कराएगी। सत्र के दौरान सरकार पिछले सत्र के बाद लाए गए 9 अध्यादेशों के स्थान पर उनके प्रतिस्थानी विधेयक और कुछ नए विधेयक पारित कराएगी। सरकार कई विभागों के कैग के प्रतिवेदन और संभल में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी सदन में पेश की जाएगी। संभल को योगी सरकार 2027 के लिए सियासी प्रयोगशाला बनाने के जुगत में है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले संभल हिंसा की रिपोर्ट को पेश कर सपा को सियासी कठघरे में खड़े करने का प्लान है।