अगर भारत को संबंध सुधारने हैं तो शेख हसीना की वापसी जरूरी शर्त
नई दिल्ली । शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार धमकियों पर उतर आई है। ढाका ने अब भारत को आंख दिखाते हुए कहा कि अगर संबंध सुधारने हैं तो शेख हसीना की वापसी जरूरी शर्त है। बांग्लादेश ने पूर्व पीएम शेख हसीना और अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर समेत कई नेताओं के प्रत्यर्पण की मांग रखी है। बांग्लादेश में जुलाई 2023 में हुए हिंसक छात्र आंदोलन के बाद तत्कालीन पीएम शेख हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थी तब से यहीं रह रही हैं। इसके बाद तारिक रहमान के सत्ता में आने के बाद से ही बांग्लादेश कई मौकों पर भारत से शेख हसीना की वापसी की मांग की है। इस पूरे मामले पर भारत सरकार का कहना है कि वह तय कानूनों की जांच के बाद ही सोच समझकर फैसला लेगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शेख हसीना को उनके ही देश में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। उन पर छात्र आंदोलन में दमन के आरोप लगे हैं और हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी माना गया है। इसके बावजूद शेख हसीना ने कहा कि वह अपने देश लौटना चाहती हैं। भारत में शरण लेने के बाद पहली बार बीते महीने शेख हसीना ने मीडिया से बातचीत की थी। बातचीत में शेख हसीना ने कहा कि वे आवामी लीग के अन्य नेताओं के साथ दिसंबर में बांग्लादेश जा सकती हैं। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश की जनता फैसला करेगी कि वह अपराधी हैं या नहीं। इससे पहले ही बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के सूचना एवं प्रसारण मामलों के सलाहकार जाहेद उर रहमान ने भारत के सामने शर्त रख दी है।
रहमान ने कहा कि शेख हसीना और अवामी लीग के अन्य नेताओं का प्रत्यर्पण ही रिश्ते सुधारने के लिए अहम शर्त है। उन्होंने बताया कि ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी के साथ हुई बैठक में भी इस मुद्दे पर बात हुई। इस बीच बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान भारत का दौरा कई बार टाल चुके हैं। भारत से मिले न्योते के बावजूद वे पहले चीन गए लेकिन अबतक भारत नहीं आए हैं। वहीं भारत ने हाल ही में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में शामिल होने के लिए बिम्सटेक अध्यक्ष के रूप में भी बांग्लादेश के पीएम को आमंत्रित किया था, लेकिन वह नहीं आए। अब खबर है कि वे दिसंबर में भारत आ सकते हैं।

