कानपुर में ओवैसी बोले- यूपी में 2027 में अलग तरह का होने वाला है चुनाव
कानपुर । ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को कानपुर में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को शुक्रिया कहा। उन्होंने एक मुलाकात के किस्से का जिक्र किया। ओवैसी ने बताया कि कैसे गडकरी ने उनके पांच विधायकों की बात को सुना और पूरा समय दिया। उन्होंने इस दौरान यूपी की योगी सरकार को भी घेरा। ओवैसी ने कहा कि बिहार में हमारे पांच विधायक जीते हैं। जीत के बाद वे नितिन गडकरी से मिले। मैं उनको भी धन्यवाद कहना चाहता हूं। उन्होंने 45 मिनट तक बैठकर 5 विधायकों की बात सुनी। पूरे जितने पुल थे, जो अंडरपास बनाने थे, हमारे सामने सब कुछ सुना।
ओवैसी ने कहा कि मैंने मंत्री गडकरी से कहा कि सर जरा फोन लगाकर आप सेंसन कर दीजिए। उन्होंने कहा ठीक है। गडकरी ने वहीं पर फोन लगाकर कहा कि जल्दी काम शुरू कर दो। ये मजलिस वाले मेरे घर पर आकर बैठे हैं। उन्होंने आगामी चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। यह न तो 2014 का चुनाव होगा, न 2017 का, न 2019 का और न ही 2022 का। यह बिल्कुल अलग चुनाव होने वाला है। यह बहुत अलग और चुनौतीपूर्ण चुनाव होगा क्योंकि बीजेपी ने अपने किए वादे पूरे नहीं किए हैं। जब समाजवादी पार्टी सत्ता में थी, तो वॉय आम बात थी। अब यहां टी आम बात है, और इसके अलावा, शासन व्यवस्था अच्छी नहीं है। आप कानून के शासन और उचित प्रक्रिया का मनमाना उल्लंघन देख रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में यह एक अलग तरह का चुनाव होने वाला है। राम मंदिर में हेराफेरी के मामले की एसआईटी रिपोर्ट जनता के सामने क्यों नहीं लाई जा रही है? सरकार इसे जारी क्यों नहीं करती? और उन लोगों को जमानत क्यों मिल रही है? यह अजीब है। यह भी चर्चा का एक बड़ा मुद्दा होगा। ओवैसी ने रविवार को उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी को सत्ता में लौटने से रोकने के लिए विपक्षी दलों से हाथ मिलाने की पेशकश की। ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी किसी संभावित राजनीतिक गठबंधन की घोषणा करने से पहले आगामी दो अक्टूबर तक इंतजार करेगी। उन्होंने कहा कि हम भी नहीं चाहते कि उत्तर प्रदेश में तीसरी बार बीजेपी की सरकार बने। अगर आप बीजेपी को फिर से सरकार बनाने से रोकना चाहते हैं, तो आइए और एआईएमआईएम के साथ हाथ मिलाइए।
उन्होंने मतदाताओं से राज्य में एआईएमआईएम को मजबूत करने का आग्रह करते हुए कहा कि मुसलमानों को यूपी विधानसभा में एक आवाज की जरूरत है। ओवैसी ने मदरसों को लेकर बीजेपी सरकार के कदमों की भी आलोचना की और स्वतंत्रता संग्राम में मुस्लिम धर्मगुरुओं और धार्मिक विद्वानों की भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने कानपुर के मदरसों के इतिहास का हवाला दिया और आरोप लगाया कि स्वतंत्रता आंदोलन में मुस्लिम उलमा ने अंग्रेजों के खिलाफ फतवा जारी किया था।

