अभी दिमाग़ में किसी चलचित्र की भांति तरह तरह के चित्र उभरने लगे हैं। मौजूदा दौर में देश में जो माहौल उभर रहा है। भविष्य में कई चौंकाने वाला परिणाम देखने को मिल सकता है। अभी हमने कुछ माह पहले इजरायल ईरान और अमेरिका को आपस में एक दूसरे का मुंह नोचते हुए देख चुके हैं। अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के आगे विश्व गुरु का तथाकथित चौला ओढ़े रंगा सियार का ट्रम्प के आगे नत मस्तक होते और तेल खरीदने के लिए ट्रम्प को तेल लगाते छप्पन इंच वाले को देख चुके हैं। आजादी के बाद एक सम्प्रभुता संपन् भारत को आपने पहली बार अमरीकी राष्ट्रपति के आगे एक गुलाम राष्ट्र की तरह घिघियाते भी देखा। यह वही देश है जो न कभी किसी के आगे झूका था। और न किसी देश पर बिना वजह आक्रमण कभी किया है। लेकिन दुर्भाग्य से एक ऐसा शासक देश को मिला जो किसी राज्य का राज्यपाल बनने योग्य भी नहीं था। वो एक रंगा सियार था जो शेर की खाल ओढकर देशवासियों के सामने आकर ” बहनों और भाइयों ” कह हाथ जोड़ मंहगाई , बेरोजगारी और भ्रष्टाचार मुक्त भारत के सपने दिखाया था । अच्छे दिन की सौगात देने, काला धन वापस लाने और हर देशवासियों के बैंक खाते में पन्द्रह लाख भेजने के वादे के साथ सत्ता पर कब्जा जमाया था। परन्तु राजनेता कम रंगा सियार ज्यादा था। सता पर बैठते ही उसने रंग बदलना शुरू किया। कपड़े बदलना शुरू किया। देश की मौजूदा स्वरूप को बदलना शुरू किया। उनकी कार्यशैली और हरकतों से वो भारत के प्रधानमंत्री कम भाजपाई प्रधानमंत्री ज्यादा लगता था । मुंह में हिन्दू मुस्लिम शब्द ऐसे चबाते रहता जैसे कोई पनखोका पान चबाते रहता है। यह आदमी देश के लिए इतना बड़ा पनौती साबित होगा यह कभी किसी ने सोचा तक नहीं होगा। अपने बारह साल के सतारूढ में देश के लिए किस तरह पनौती साबित हुआ यह भी देखना बड़ा दिलचस्प होगा। रंगा सियार सरकार ने पहला काम यह किया कि देश में करीब एक लाख स्कूलों को बंद करवा दिया और देश के हर जिलों में अपनी पार्टी का मुख्यालय खोलवा दिया। पत्रकारों ने जब इसका कारण पूछा तो सरकार की ओर से जवाब आया, ” किसी स्कूल में शिक्षक नहीं थे तो किसी में शिक्षक थे तो बच्चे नहीं, बहुत से स्कूलों की हालत खराब थी। किसी में पानी चू रहा था तो किसी में खिड़की दरवाजे नहीं थे..! ”
” सरकार चाहती तो शिक्षकों की बहाली कर इन सभी समस्याओं से निपटा जा सकता था। स्कूल बंद हो जायेंगे तो बच्चे पढेंगे कहां..? “
” पढने वाले बच्चों के लिए स्कूलों की कमी नहीं है, कहीं भी जाकर पढ़ लेंगे। हम तो देश में राम राज लाने की सोच रहे हैं। उसके लिए हम देश के हर कोने में बड़े बड़े मंदिरों का निर्माण करने की तैयारी में है। भारत को विश्व गुरु भी बनाना है..! “
तब से बारह साल गुजर गए। न राम राज आया, न अच्छे दिन आये और न देश विश्व गुरु बना। हां दुनिया की नज़र में भारत रेपिस्टों का देश जरूर बन गया है। कुलदीप सिंह सेंगर जैसे रेपिस्ट आज देश के हर जिलों में मिल जाएंगे। आप कहेंगे इससे यह कहां साबित हुआ कि अपना रंगा सियार देश के लिए पनौती है। रूकिए जरा। आपको याद होगा। हर देशवासी के बैंक खाते में पन्द्रह लाख भेज दिया जायेगा। ऐसा रंगा सियार ने मंचों से बार बार बका था। अब देखो मजा, पन्द्रह लाख की लालच में हर वो आदमी जो कभी बैंक गया नहीं था। खाता खुलवा लिये और घर बैठे ” अब पन्द्रह लाख आयेंगे ” का इंतजार में दिन काटने लगे। लेकिन दस साल निकल गया किसी के बैंक खाते में एक अन्ना पैसा भी नहीं आया। उल्टे जो घर में हजार दो हज़ार बर- बीमारी के लिए बचा कर रखा गया था। उसे भी बैंक में जमा करवा लिया। भूल गए ” नोटबंदी ” रंगा सियार का मास्टर स्ट्रोक। किस तरह 2016 की मध्य रात्रि में उसी रंगा सियार ने देश की टेलीविजन पर मुंह फाडा था, ” बहनों- भाइयों “
फिर देश में जो कुछ हुआ वो आपने अपनी आँखों से देखा ही होगा। नोट जमा करने, नोट बदलने के लिए करोड़ों देशवासियों को बैंक के बाहर लइन पर खड़े करवा दिया था पनौती ने। कहा था कि इससे देश को बहुत फायदा होगा।। काला धन सफेद हो जायेगा और इस नोट बंदी से नक्सलीयों की कमर टूट जाएगी। लेकिन हुआ उल्टा। कमर टूटी दिहाड़ी करने वाले मजदूरों। इसी तरह जब जब उस पनौती ने मुंह फाडा, ” बहनों-भाइयों ” तब तब देशवासियों को संकटों का सामना करना पड़ा। नोटबंदी की मार कराहते लोग अभी अपनी कमर सीधी भी नहीं कर पाए थे कि उस पर ” जी एस टी यानि गब्बर टैक्स ” लाद दिया गया। जैसे औरंगजेब ने अपने शासन काल में सरिया टैक्स अपने प्रजा के ऊपर लाद दिया था।
जी एस टी की मार देशवासियों पर बहुत भारी पडी। देश के करोड़ों मझौले कारोबारियों के हाथ से कारोबार छूट गया। लाखों बेरोजगार हो गये। कितनों ने आत्महत्या कर ली। बहुते महुआ दारू पीकर मर खेपा गये। लखटकिया ठेकेदार सड़क पर आ गए और हाट बाजारों में सन्नटा छा गया। मंहगाई आसमान छू गई और किताब कापियाँ कराहने लगीं। इतना ही नहीं। रेल किराइयों में ऐतिहासिक बढोत्तरी हो गई। दो रूपये वाला प्लेट फारम टिकट बीस तीस कर दी गई। सिनियर सिटीजन की सुविधा रेलवे ने खत्म कर दिया। और यह सब उस पनौती कारण हुआ था। जिसे आपने बिना मुकुट का राजा चुना था। बाल न बच्चा फिर भी देश को चबा रहा है कच्चा ….!
श्यामल बिहारी महतो

