मंदिर निर्माण से जुड़ा कोई भी कार्य समिति के अध्यक्ष के फैसले के बिना नहीं हुआ

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-पूर्व महासचिव चंपत राय ने नृपेंद्र मिश्र को लेकर नौ पन्नों का पत्र जारी कर लगाए आरोप
नई दिल्ली । अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे नृपेंद्र मिश्र को लेकर नौ पन्नों का पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने मंदिर निर्माण से लेकर परिसर के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और ट्रस्ट की व्यवस्था तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चंपत राय ने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़े अहम फैसलों में नृपेंद्र मिश्र की भूमिका बेहद प्रभावशाली रही और उनकी पसंद के लोगों को समिति में शामिल किया गया। चंपत राय के मुताबिक मंदिर निर्माण समिति की बैठकों में फैसले लिए जाते थे, लेकिन कई मामलों में बाद में बदलाव कर नृपेंद्र मिश्र के निर्णयों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने दावा किया कि मंदिर निर्माण से जुड़ा कोई भी महत्वपूर्ण कार्य समिति के अध्यक्ष के फैसले के बिना नहीं हुआ। पत्र में यह भी कहा गया है कि उनकी पसंद के कुछ लोग समिति में शामिल किए गए, जिनमें से कुछ छह साल में केवल एक-दो बार ही अयोध्या आए हैं।
चंपत राय ने कहा कि नृपेंद्र मिश्र के सुझाव पर लार्सन एंड टूब्रो को मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी। टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को परियोजना प्रबंधन सलाहकार बनाया गया। मंदिर के वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा को 1986 में अशोक सिंघल ने चुना था और बाद में उन्हें ही निर्माण योजना में बनाए रखा। परिसर के अन्य भवनों के डिजाइन का काम नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म को दिया गया। चंपत राय ने पत्र में राम जन्मभूमि विवाद के इतिहास और मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने तक की घटनाओं का भी उल्लेख किया।
चंपत राय ने मंदिर की दर्शन व्यवस्था और वित्तीय प्रणाली की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद प्रतिदिन 75 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचने लगे। महाकुंभ में यह संख्या तीन लाख से ज्यादा थी। श्रद्धालुओं के लिए आठ अलग-अलग लाइनें बनाई गई हैं। ट्रस्ट के बैंक खातों में चेकबुक का इस्तेमाल नहीं होता और भुगतान बैंक ट्रांसफर से किए जाते हैं। खातों का आंतरिक और वैधानिक ऑडिट भी कराया जाता है।
बता दें राम मंदिर में चढ़ावे चोरी का मामला सामने आने के बाद चंपत राय ने 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 6 जुलाई को उन्होंने ट्रस्टी अनिल मिश्र को लेकर भी आरोप लगाए थे। अब नृपेंद्र मिश्र पर जारी नौ पन्नों के पत्र से मंदिर निर्माण और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर विवाद फिर चर्चा में आ गया है।