केंद्र सरकार ने एथेनॉल बनाने में गन्ने का इस्तेमाल होने से किया है इनकार
नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी (शक्कर) की बढ़ती कीमतों और कम होते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि त्योहारों से पहले मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट चीनी की मिठास में घुल गई है। खड़गे ने सरकार से सवाल किया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया। उन्होंने 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की नौबत पर भी सवाल उठाया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खड़गे ने कहा कि ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां विदेश से चीनी आयात की जा रही है और दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल में झोंका जा रहा है। भारत सरकार में खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया था कि देश में चीनी की खुदरा कीमत 20 जुलाई के 48 से बढ़कर करीब 56 रुपए प्रति किलो हो गई है, जबकि एक्स-मिल कीमत 7-10 दिनों में 47-48 से बढ़कर 62 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है। सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल बनाने में गन्ने के इस्तेमाल को जिम्मेदार मानने से इनकार कर दिया है। खाद्य सचिव ने कहा कि देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक है। कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के पीछे मिलों की ओर से दाम बढ़ाना, जमाखोरी और सट्टेबाजी प्रमुख वजह हैं।
खाद्य सचिव के मुताबिक अब देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से आता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनता है। एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12फीसदी थी। यह 2025-26 में घटकर करीब 9फीसदी रह गई है। मौजूदा सीजन में एथेनॉल के लिए सिर्फ 28 लाख टन चीनी डायवर्ट की गई है। इस सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 एलएमटी था। रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ ज्यादा बारिश से खेतों में पानी भरने के कारण उत्पादन घटा है। मंत्रालय का कहना है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
बता दें चीनी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ा है। 2026-27 में दुनिया में चीनी की कमी करीब 33 एलएमटी रहने का अनुमान है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई यानी दो महीने से भी कम समय में 16फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। घरेलू बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए सरकार ने डीलर्स पर 400 टन की स्टॉक लिमिट 30 नवंबर तक लागू की है। वहीं, थोक उपभोक्ताओं के लिए 1 सितंबर से 15 दिन की स्टॉक सीमा लागू होगी। कृत्रिम कमी रोकने के लिए केंद्र और राज्य की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक का सत्यापन भी कर रही हैं।

