नागपुर के कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने कहा- सेहत ठीक हो तो ही सत्ता, संपत्ति और सफलता का महत्व, युवाओं को रोज व्यायाम की सलाह
नागपुर । केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि अब वे पहले की तरह ज्यादा काम नहीं कर पा रहे हैं और समय आ गया है कि जिम्मेदारियां नई पीढ़ी को सौंपी जाएं। उन्होंने यह बात नागपुर के काटोल में आयोजित ‘एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ में आदिवासी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। गडकरी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति में उनके बयान के राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं।
केंद्री मंत्री गडकरी ने कहा कि युवाओं को आगे बढ़कर जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। उनके बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के केंद्रीय राजनीति में जाने को लेकर अटकलें चल रही हैं। हालांकि गडकरी ने अपने संबोधन में किसी राजनीतिक बदलाव या पद को लेकर कोई सीधी बात नहीं कही। गडकरी ने अपने पुराने दिनों का किस्सा साझा करते हुए बताया कि युवावस्था में उनकी जीवनशैली काफी अनियमित थी। पार्टी के काम के दौरान शाम को समोसा खाकर सो जाने की बात उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताई। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद उन्होंने अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देना शुरू किया।
उन्होंने युवाओं से रोज कम से कम आधा घंटा व्यायाम और प्राणायाम करने की अपील की।
गडकरी ने बताया कि वह अब रोज सुबह करीब ढाई घंटे एक्सरसाइज और प्राणायाम करते हैं तथा उनका ट्रेनर उन्हें वर्कआउट करवाता है। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों की यादें साझा करते हुए गडकरी ने बताया कि उस समय कार्यकर्ता साइकिल और स्कूटर से पार्टी के काम के लिए निकलते थे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि उनके पास लूना थी, जो चलने पर ‘कू-कू’ जैसी आवाज करती थी। बाद में विजय स्कूटर आया, जिस पर चार-चार लोग बैठकर पार्टी के काम के लिए जाते थे। पुलिस से बचने के लिए पीछे बैठे लोग नंबर प्लेट पर हाथ रख लेते थे।
‘सेहत खराब तो सत्ता-संपत्ति सब बेकार’
गडकरी ने जीवन की अनिश्चितता और स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शरीर स्वस्थ हो तभी सत्ता, संपत्ति, सुंदरता और ज्ञान का महत्व है। उन्होंने कहा कि जीवन में इंसान बहुत कुछ हासिल करता है, लेकिन अंततः उसे सब कुछ यहीं छोड़कर जाना पड़ता है। इसलिए स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है।
आदिवासी गांवों में शिक्षा का उजाला पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम में गडकरी ने ‘एकलव्य एकल विद्यालय’ के सामाजिक कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का उजाला पहुंचाना जरूरी है। उनका लक्ष्य ऐसा अभियान खड़ा करना है, जिससे कोई भी आदिवासी गांव शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने युवाओं से खुद को सक्षम बनाने और गरीब तथा वंचित वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देने का आह्वान किया। गडकरी के ‘नई पीढ़ी को जिम्मेदारी’ वाले बयान को महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

