यामी गौतम धर ने बताया कि मेरा मानना है कि कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो आपकी अपनी सोच और विश्वास से बेहद सच्चे और बेबाक तरीके से जुड़ती हैं। मुझे पहली बार शाह बानो का नाम तब पता चला था, जब उनकी कहानी सुर्खियों में थी। मुझे आज भी उनकी हेडशॉट तस्वीर में उनकी वह गहरी और परेशान कर देने वाली नज़र याद है। उस तस्वीर में कुछ ऐसा था, जिसमें बहुत गहराई थी। एक टीनएजर के तौर पर भी मुझे लगा था कि उस तस्वीर में कुछ अलग और बहुत ताकतवर था।
हर टेक से पहले मैं शाह बानो की उस तस्वीर को अपने दिमाग में लाती थी। इससे मुझे याद रहता था कि मैं सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं बता रही हूँ, बल्कि उन बहुत सी महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रही हूँ, जिन्होंने सम्मान और इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ी है। यह ऐसा किरदार है, जिसे कोई भी एक्टर निभाने का सपना देखेगा। उनकी कहानी में बहुत गहराई है और मेरे लिए इसे खास बनाने वाली बात यह थी कि मुझे ऐसी महिला का किरदार निभाने का मौका मिला, जिसने उस समय अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाई, जब महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर इतनी खुलकर बातचीत नहीं होती थी।

