ब्रीक्स पारंपरिक खेल महोत्सव का आगाज, भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर मिला गौरव

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केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने किया शुभारंभ, विभिन्न देशों के पारंपरिक व स्वदेशी खेलों का प्रदर्शन

  • हर्ष संघवी ने पारंपरिक खेलों के संरक्षण के लिए ब्रीक्स देशों के सामने रखे पांच प्रस्ताव; 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की दावेदारी का भी उल्लेख
    अहमदाबा | केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने सोमवार को अहमदाबाद के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में केंद्रीय खेल मंत्रालय की ओर से गुजरात सरकार के सहयोग से आयोजित ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल-2026 का शुभारंभ किया। इस उद्घाटन समारोह में गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद रहे।
    इस अवसर पर केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि पारंपरिक खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि देशों की सांस्कृतिक पहचान, विरासत और पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित परंपराओं को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने खेलों के जरिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सांस्कृतिक समझ और सर्वसमावेशक विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खेल के बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए मैदान से लेकर वैश्विक स्तर तक अवसरों का निर्माण हो रहा है। प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, इंफ्रास्ट्रक्चर, खिलाड़ियों के कल्याण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव जैसे विभिन्न पहलुओं को कवर करते हुए एक सर्वांगीण दृष्टिकोण के माध्यम से टिकाऊ खेल इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है। खेलो इंडिया जैसी पहलों के जरिए खेल और शारीरिक तंदरुस्ती को जनजीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
    केंद्रीय खेल मंत्री ने कहा कि पारंपरिक खेल स्थानीय जीवनशैली, व्यवसायों, रीति-रिवाजों और त्योहारों से जुड़े होने के कारण उनमें समाज का ज्ञान, सांस्कृतिक मूल्य और ऐतिहासिक विरासत समाया हुआ है। मल्लखंभ जैसे खेल शारीरिक संतुलन और नियंत्रण का उत्तम उदाहरण हैं। वहीं, कलरीपयट्टू जैसा परंपरागत मार्शल आर्ट भारत की समृद्ध खेल परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। योग के जरिए भारत ने शारीरिक कसरत के साथ-साथ मन, शरीर और आत्मा के संतुलन का संदेश दुनिया तक पहुंचाया है।
    उन्होंने खेल क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी, समान अवसर और समावेशी व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही, पारंपरिक खेलों का दस्तावेजीकरण करने, उनके सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखने और नई पीढ़ी तक इस विरासत को पहुंचाने के लिए विभिन्न देशों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान, अंतरराष्ट्रीय भागीदारी और नियमित संवाद को प्रोत्साहन देने की भी वकालत की।
    गुजरात में पहली बार आयोजित हो रहे ब्रिक्स पारंपरिक और स्वदेशी प्रदर्शन खेल के शुभारंभ पर उप मुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी ने भारत की प्राचीन खेल विरासत तथा योग एवं मल्लखंभ जैसी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पारंपरिक और स्वदेशी खेल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और पीढ़ी-दर-पीढ़ी बचाकर रखी गई राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक हैं।
    उन्होंने आगे कहा कि इन पारंपरिक और स्वदेशी खेलों का महोत्सव केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश की लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन तथा विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण मंच है।
    उन्होंने कहा कि भारत की खेल परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है। ऋग्वेदकाल में रथदौड़ के उल्लेख से लेकर भगवान श्री राम के धनुर्विद्या कौशल और महाभारत काल की मल्लयुद्ध परंपरा तक, भारतीय संस्कृतिक में खेलों को एक विशिष्ट स्थान मिला है। यह परंपरा अनुशासन, गुरु के प्रति आदर, निरंतर अभ्यास, नियम पालन और जिम्मेदारी जैसे जीवन मूल्यों का संवर्धन करती है। खेल की वैश्विक भाषा, भाषा, वेशभूषा और संस्कृति कि विविधता के बीच भी लोगों को एकता के सूत्र में बांधती है।
    उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात सहित पूरे देश में मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम विकसित हो रहा है। गुजरात सरकार भी जिला एवं तहसील स्तर पर खेल परिसर विकसित कर गांवों तक आधुनिक खेल सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
    उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पारंपरिक खेलों का संरक्षण यानी हमारी सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण। हमारा यह संकल्प होना चाहिए कि यह विरासत देशों के बीच मित्रता को अधिक मजबूत बनाए और राष्ट्रीय एकता को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाए। अहमदाबाद में वर्ष 2029 के इंटरनेशनल वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स तथा वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेल आयोजित होंगे। इसके अलावा, उन्होंने वर्ष 2036 के ओलंपिक के आयोजन के लिए भी भारत की मजबूत दावेदारी का उल्लेख किया।
    इस अवसर पर उन्होंने ब्रिक्स देशों के समक्ष पारंपरिक खेलों के संरक्षण और वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहन के लिए पांच प्रस्ताव रखे। इनमें संयुक्त बहुभाषी डिजिटल आर्काइव बनाना, स्कूलों और कॉलेजों में पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहन देना, सुरक्षित खेल-फॉर्मेट का विकास करना, स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार के अवसरों का निर्माण करना और इस आयोजन को स्थायी परंपरा बनाना शामिल है।
    उप मुख्यमंत्री ने विभिन्न देशों से आए खिलाड़ियों और आयोजकों तथा खेल मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी सहभागियों को गुजरात की संस्कृति और आतिथ्य का आनंद उठाने के लिए शुभकामनाएं दीं।
    भारत सरकार के खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव (खेल विकास) कुणाल ने स्वागत भाषण में कहा कि पारंपरिक खेल विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और सामुदायिक जीवन का प्रतिबिंब हैं। इन खेलों के माध्यम से विभिन्न देशों की संस्कृति को समझने, परस्पर अनुभवों का आदान-प्रदान करने और सहयोग की भावना को मजबूत करने का अवसर मिलता है।
    इस मौके पर राज्य के खेल सचिव डॉ. राहुल गुप्ता, विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (बहुपक्षीय आर्थिक संबंध) शंभू हक्की, एडीजी चंचल शेखर सहित ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि और खिलाड़ी मौजूद रहे।
    (बॉक्स)
    ब्रिक्स देशों ने अहमदाबाद में पारंपरिक और स्वदेशी खेलों की सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया
  • भारत : मल्लखंभ, योगासन, कलरीपयट्टू
  • बेलारूस : गोरोडकी
  • बोलीविया : लुचा डी चोलितास, टिंकू, रायुएला, ट्रॉम्पो, कैचिनास और कैरेरा डी सैकोस
  • ब्राजील : जाराबटाना (स्वदेशी ब्लोपाइप), कोरिडा डी टोरस (लॉग रेस), ब्राजील के पैरा-जिउ-जित्सु और कैपोएरा
  • चीन : वुशु, शेर नृत्य और हेल्थ किगोंग
  • इथियोपिया : इथियोपियाई कुश्ती (टेगल), इथियोपियाई गेना (फील्ड हॉकी) और सेलस गेबेटा/18-12/ब्यूब/शहे
  • ईरान : जूरखानेह, हफ्ट सांग और गनीह
  • कजाखस्तान : असिक अतु, टोग्यजकुमालक और कजाक कुरेसी
  • रूस : गोरोडकी और साम्बो
  • दक्षिण अफ्रीका : कगाती और इंटोंगा
  • संयुक्त अरब अमीरात : अल तब्बा