नई दिल्ली आठवां केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) अपनी सलाह-मशविरे की प्रक्रिया में तेजी ला रहा है। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग फिलहाल विभिन्न कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगी संघों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ गहन बैठकें कर रहा है। केंद्र सरकार के लगभग 49 लाख कर्मचारियों और 68 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते और पेंशन में बदलाव का मार्ग प्रशस्त करने वाली यह कवायद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समय के साथ बढ़ती महंगाई और बदलती अर्थव्यवस्था को देखते हुए, केंद्र सरकार हर 10 साल में अपने कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग का गठन करती है।
हालांकि, सरकार हर 6 महीने में महंगाई भत्ता बढ़ाती है, लेकिन कर्मचारियों के जीवन स्तर में सुधार के लिए मूल वेतन में बदलाव जरूरी हो जाता है। नए वेतन आयोग की सिफारिशें केंद्र सरकार के सभी कर्मचारियों और रिटायर हो चुके पूर्व सैनिकों के लिए फायदेमंद होंगी। माना जा रहा है कि आठवां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू होगा, हालांकि, आयोग द्वारा अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने का काम अभी बाकी है। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए मई 2027 तक का समय दिया गया है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्रालय और मंत्रियों का एक विशेष समूह इसकी सिफारिशों का बारीकी से अध्ययन करेगा। इसमें देश के खजाने पर पड़ने वाले बोझ और प्रस्तावित बदलावों की व्यवहार्यता का आकलन किया जाएगा।
समीक्षा पूरी होने पर, इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा और कैबिनेट की मंजूरी के बाद आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में अतिरिक्त 3-6 महीने का समय लग सकता है, जिसके बाद ही बढ़ा हुआ वेतन कर्मचारियों के खातों में आएगा। आयोग ने हाल ही में बेंगलुरु का दौरा किया था और दशहरे के तुरंत बाद एक और बड़ी बैठक की तैयारी है। इसी क्रम में, आठवां वेतन आयोग आगामी 22-23 अक्टूबर को मुंबई का दौरा करेगा। इस दौरान आयोग शहर में सेंट्रल रेलवे जोन के तहत विभिन्न रेलवे विभागों का विशेष रूप से निरीक्षण करेगा ताकि कर्मचारियों की जमीनी स्तर की कार्य स्थितियों का सीधा अनुभव मिल सके। दौरे के एजेंडे में ट्रैक मेंटेनेंस, सिग्नल ऑपरेशन, ड्यूटी और मेंटेनेंस के काम, कंट्रोल रूम और काम से जुड़े जोखिमों का जायजा लेना शामिल है। रेल मंत्रालय ने ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन जैसी मान्यता प्राप्त फेडरेशनों को इस दौरे की जानकारी दी है। इन बैठकों से जमीनी स्तर के कर्मचारियों, जैसे ट्रैकमेन, स्टेशन मास्टर और लोको पायलटों के वास्तविक मुद्दे सामने आने की उम्मीद है, जो अक्सर फाइलों में दबकर रह जाते हैं।

