-यह जहाज भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमताओं को दर्शाता
नई दिल्ली । अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट जहाज है, जो देश की तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी-रोधी क्षमताओं को अभेद्य बनाता है। स्वदेशी रक्षा निर्माण और आत्मनिर्भर भारत पहल को एक और मजबूती देते हुए इसे भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। केरल के कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा बनाए गए आईएनएस मंगरोल का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के तटीय शहर मंगरोल के नाम पर रखा गया है। यह माइनस्वीपर आईएनएस मंगरोल (एम85) की विरासत को आगे बढ़ाएगा, जिसने 2004 तक नौसेना की सेवा की थी।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जहाज का यह नामकरण नौसेना की उस परंपरा को जारी रखता है जिसके तहत वह अपने पुराने युद्धपोतों की विरासत को संजोकर रखती है। आईएनएस मंगरोल में 80 फीसदी से ज्यादा सामग्री स्वदेशी है। यह युद्धपोत बनाने में भारत की बढ़ती क्षमताओं को दिखाता है और देश में रक्षा क्षेत्र में जहाज निर्माण को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। आईएनएस मंगरोल में सभी ज़रूरी आधुनिक हथियार और सेंसर लगे हैं, जिनमें अभय हल-माउंटेड सोनार, हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और मारीच एडवांस्ड टॉरपीडो डिकॉय सिस्टम शामिल हैं। इससे भारतीय नौसेना को कम गहरे पानी (शैलो वॉटर) में पानी के नीचे के खतरों से निपटने में मदद मिलेगी। मंत्रालय ने कहा, वॉटरजेट प्रोपल्शन वाले तीन डीजल इंजनों से चलने वाला यह जहाज कम गहरे पानी में ऑपरेशन के लिए बहुत आसानी से मुड़ने और गति करने (मैन्युवरेबिलिटी) की क्षमता रखता है। यह पानी के नीचे निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशन और माइन वॉरफेयर से जुड़े काम करने में भी सक्षम है। बंदरगाहों और हार्बर की सुरक्षा की क्षमता बढ़ाना
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आईएनएस मंगरोल के शामिल होने से भारतीय नौसेना को बंदरगाहों, हार्बर और तटीय इलाकों की सुरक्षा करने और साथ ही बड़े बेड़े के ऑपरेशन में मदद करने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। जिन इलाकों में बड़े जहाजों को काम करने में मुश्किल होती है, वहां आईएनएस मंगरोल नौसेना की पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेगा।
इसके अलावा, यह पनडुब्बी से जुड़े खतरों का पता लगाने और उनका मुकाबला करने के लिए समुद्री गश्ती विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य युद्धपोतों के साथ भी काम कर सकता है। मंत्रालय ने कहा कि बदलते समुद्री सुरक्षा माहौल में पानी के नीचे बढ़ते खतरों के बीच, मंगरोल का शामिल होना भारतीय नौसेना की पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमताओं, खासकर तटीय जलक्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। इस जहाज का शामिल होना भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमताओं को भी दर्शाता है और ऑपरेशनल तैयारी और आत्मनिर्भर भारत के प्रति नौसेना की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।

