:: पिछली गर्मी में सूखे थे 6 हजार ट्यूबवेल; अब टैंकर बढ़ेंगे, जीपीएस से होगी निगरानी, नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज भी सुधरेंगे ::
इंदौर । शहर में इस बार बारिश कम होने से आने वाले महीनों में पानी का संकट गहराने की आशंका है। जिले में मानसून के दौरान सामान्य से 27% कम बारिश हुई है। इसे देखते हुए नगर निगम ने जल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार से 50 करोड़ रुपए मांगे हैं। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जरूरत पड़ने पर 100 करोड़ रुपए तक उपलब्ध कराने की बात कही है।
गुरुवार को हुई समीक्षा बैठक में पानी की उपलब्धता और आगामी गर्मी की तैयारियों पर चर्चा हुई। अधिकारियों को सूखे और खराब ट्यूबवेल तत्काल दुरुस्त करने, जरूरत के मुताबिक पाइप की गहराई बढ़ाने और नर्मदा पाइपलाइन के लीकेज ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन इलाकों में नर्मदा का पानी नहीं पहुंचता, वहां टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। टैंकरों की निगरानी जीपीएस से होगी।
:: सामान्य से 235 मिमी कम बारिश, भूजल पर बढ़ेगा दबाव ::
इंदौर जिले में 1 जून से 30 सितंबर तक 633.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 868.1 मिमी है। यानी 235 मिमी कम पानी बरसा। कम बारिश से भूजल रिचार्ज प्रभावित होने की आशंका है।
शहर की जलापूर्ति मुख्य रूप से नर्मदा नदी पर निर्भर है। खरगोन जिले के जलूद से करीब 80 किमी लंबी पाइपलाइन के जरिए पानी इंदौर लाया जाता है। लेकिन शहर के करीब 30% हिस्से में नर्मदा की पाइपलाइन नहीं है। इन इलाकों में लोग ट्यूबवेल और टैंकरों पर निर्भर हैं।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के मुताबिक, पिछली गर्मी में शहर के करीब 6 हजार ट्यूबवेल सूख गए थे। इस बार बारिश कम होने से ऐसे ट्यूबवेल की संख्या बढ़ने की आशंका है। इसी वजह से पाइपलाइन से वंचित इलाकों के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है।
:: रोज 650 एमएलडी पानी की जरूरत ::
महापौर के मुताबिक, इंदौर को नर्मदा से रोज करीब 450 मिलियन लीटर पानी मिलता है। पाइपलाइन से वंचित इलाकों की जरूरत करीब 200 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इस तरह शहर की कुल दैनिक जरूरत लगभग 650 एमएलडी है।
पानी बचाने के लिए पेयजल से वाहन धोने वालों पर जुर्माना लगाने के निर्देश दिए गए हैं। बगीचों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर उपचारित पानी के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। बिना अनुमति पेयजल संयंत्र चलाने वालों पर कार्रवाई होगी।
:: नए ट्यूबवेल पर रोक लगाने का फैसला नहीं ::
शहर में नए ट्यूबवेल खोदने और नए जल कनेक्शन देने पर प्रतिबंध लगाने का अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। महापौर ने बताया कि नर्मदा पाइपलाइन से नए थोक जल कनेक्शन देने पर रोक लगाई गई है। उन्होंने जिला प्रशासन से नए ट्यूबवेल की खुदाई पर भी प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया है।
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि आपात स्थिति में कानूनी प्रावधानों के तहत निजी ट्यूबवेल अधिग्रहित किए जा सकते हैं। जल संकट वाले इलाके में निजी ट्यूबवेल से पानी बेचने पर संबंधित ट्यूबवेल जब्त किया जा सकता है।
नगर निगम की योजना दिसंबर में नर्मदा-गंभीर और नर्मदा-क्षिप्रा लिंक परियोजनाओं के जरिए यशवंत सागर और बिलावली तालाबों को भरने की भी है।
भूजल वैज्ञानिक सुधींद्र मोहन शर्मा ने कहा कि कम बारिश से भूजल का पुनर्भरण घटा है। तापमान बढ़ने पर वाष्पीकरण बढ़ने और मिट्टी की नमी घटने से पानी की जरूरत और बढ़ सकती है। उन्होंने प्रशासन और नागरिकों को मिलकर जल बजट बनाने की सलाह दी, ताकि अगले मानसून तक उपलब्ध पानी के हिसाब से खपत तय की जा सके।

