7 जिलों में बनेंगे इंडस्ट्रियल हब, ₹3 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

मध्य प्रदेश

:: जबलपुर-भोपाल-इंदौर कॉरिडोर को मंजूरी; पहले चरण में 10 हजार एकड़ में 3 से 5 हब, 6 लाख रोजगार का अनुमान ::
भोपाल/इंदौर । मध्यप्रदेश में जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर विकसित करने को मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई बैठक में कॉरिडोर के विकास के लिए विशेष कंपनी बनाने का निर्णय लिया गया। परियोजना के तहत सात जिलों में औद्योगिक हब विकसित होंगे। सरकार को इससे 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश और 6 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
कॉरिडोर में जबलपुर, भोपाल, इंदौर, देवास, सीहोर, रायसेन और नरसिंहपुर शामिल हैं। पहले चरण में करीब 10 हजार एकड़ में 3 से 5 औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे। सरकारी आकलन के मुताबिक, मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश आकर्षित हो सकता है। इससे करीब एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने का अनुमान है।
:: जबलपुर में रक्षा, भोपाल में आईटी और इंदौर में विनिर्माण ::
कॉरिडोर में जिलों की औद्योगिक क्षमता के अनुसार उद्योग विकसित किए जाएंगे। जबलपुर में रक्षा उत्पादन, एयरोस्पेस, भारी इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स; भोपाल में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अनुसंधान; जबकि इंदौर में उन्नत विनिर्माण और आईटी सेवाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। कॉरिडोर को देवास और पीथमपुर के मौजूदा औद्योगिक नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा।
नरसिंहपुर और रायसेन में फूड पार्क, कृषि प्रसंस्करण इकाइयां, वेयरहाउस और कोल्ड चेन विकसित करने का प्रस्ताव है। सीहोर में खाद्य प्रसंस्करण, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। औद्योगिक हब में विकसित जमीन, सड़क, बिजली, औद्योगिक जल, सीवरेज और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। श्रमिकों के लिए आवास, अस्पताल, स्कूल और कौशल विकास केंद्र भी विकसित किए जाएंगे।
:: ₹120 करोड़ की शुरुआती सहायता से बनेगी कंपनी ::
कॉरिडोर के विकास के लिए जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड गठित होगी। राज्य सरकार इसमें 100 करोड़ रुपए की प्रारंभिक चुकता अंशपूंजी और 20 करोड़ रुपए का ब्याज-मुक्त ऋण देगी। कंपनी औद्योगिक हब की योजना बनाने, आंतरिक बुनियादी ढांचा विकसित करने और निवेश आकर्षित करने का काम करेगी। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों का निर्माण लोक निर्माण विभाग तथा संबंधित एजेंसियां करेंगी।
स्वीकृत कार्ययोजना के अनुसार, पहले 30 दिनों में कंपनी का गठन और निदेशक मंडल की स्थापना होगी। छह महीने में कॉरिडोर की जीआईएस मैपिंग और भूमि बैंक तैयार करने, नौ महीने में प्राथमिक हबों के मास्टर प्लान बनाने तथा 12 महीने में विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन और जरूरी अनुमतियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का लक्ष्य है। भूमि चयन के लिए पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान पोर्टल की मदद ली जाएगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली गवर्निंग काउंसिल और डिजिटल डैशबोर्ड से परियोजना की निगरानी होगी।
सरकार का लक्ष्य औद्योगिक निवेश को बड़े शहरों से आगे छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाना है। हालांकि, निवेश और रोजगार के अनुमानित लक्ष्य जमीन की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे के विकास, जरूरी अनुमतियों और निवेशकों की भागीदारी पर निर्भर करेंगे।