केंद्र ने किया नियम में संशोधन, निजी स्कूल के शिक्षक भी करेंगे जनगणना कार्य

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नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने जनगणना कार्य के लिए निजी विद्यालयों के शिक्षकों की तैनाती का रास्ता साफ किया है। मोदी सरकार ने जनगणना नियम, 1990 में महत्वपूर्ण संशोधन कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों के शिक्षकों को भी प्रगणक के रूप में नियुक्त करने की अनुमति दी है। भारत के महापंजीयक (आरजीआई) मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से बदलाव लागू किया है।
पहले के नियमों के अनुसार, जनगणना अधिकारी के तौर पर मुख्य रूप से सरकारी, स्थानीय निकायों के शिक्षकों, लिपिकों या अन्य अधिकारियों को ही नियुक्त किया जा सकता था। अब संशोधित नियमों में यह दायरा काफी बढ़ाया गया है। नई अधिसूचना में साफ किया गया है कि सरकारी, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त या गैर-सहायता प्राप्त निजी निकायों, सोसायटी या न्यासों के किसी भी शैक्षणिक संस्थान के शिक्षक जनगणना कार्य में लगाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, केंद्र, राज्य सरकार, लोकल निकाय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, बैंक और अन्य प्रतिष्ठानों के लिपिक या अधिकारी, तथा कोई भी अन्य व्यक्ति इस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन उपयुक्त समझे, उन्हें भी इस कार्य के लिए नियुक्त किया जा सकेगा।
यह महत्वपूर्ण संशोधन पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चल रहे मामले की पृष्ठभूमि में आया है। हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस ने याचिका दायर कर गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी में तैनाती को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि जनगणना अधिनियम, 1948 या उसके तहत बने नियम सरकार को गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षकों को प्रगणक नियुक्त करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं देता है। उनका तर्क था कि जनगणना अधिनियम की धारा 4ए विशेष रूप से लोकल निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाओं की बात करती है, जबकि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल इस परिभाषा के दायरे में नहीं आते। उच्च न्यायालय के जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने 8 अक्टूबर के अपने आदेश में हरियाणा सरकार के उन पत्रों पर रोक लगा दी थी, जिनमें जनगणना ड्यूटी के लिए शिक्षकों का ब्यौरा मांगा गया था। अब मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल, 2027 को निर्धारित है।
स्वतंत्रता के बाद यह भारत की आठवीं जनगणना होगी। यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जानी है, जिसमें पहले चरण में गृह सूचीकरण और घरों की गणना होगी, जबकि दूसरे चरण में आबादी की गिनती की जाएगी। दरअसल, यह जनगणना मूल रूप से वर्ष 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था।