:: तीन माह में देवास के शिल्पी ने तैयार की रजत साड़ी, महाआरती में उमड़े हजारों श्रद्धालु; मां गायत्री और महाकाली के लिए भी बनेंगी पांच-पांच किलो की साड़ियां ::
इंदौर 19 अक्टूबर। नवरात्रि की नवमी पर सोमवार शाम अन्नपूर्णा मंदिर में महाआरती के बीच मां अन्नपूर्णा को पांच किलो चांदी से निर्मित साड़ी समर्पित की गई। साड़ी अर्पित होते ही हजारों श्रद्धालुओं के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। चांदी पर उकेरे गए बेल-बूटे और फूलों की बारीक आकृतियां साड़ी की खासियत हैं।
आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज के सानिध्य में हुए आयोजन में मंदिर के संचालक स्वामी जयेन्द्रानंद गिरि महाराज, आश्रम के न्यासी मंडल के सदस्य और दानदाता परिवार के प्रतिनिधि मौजूद रहे। मंदिर से जुड़े दानदाताओं के सहयोग से तैयार साड़ी को देवास के रजत शिल्पी अखिलेश सोनी (सांवेर वाले) ने करीब तीन माह की मेहनत से बनाया है। साड़ी के पल्लू और आंचल पर की गई बारीक नक्काशी इसकी विशेषता है।
स्वामी जयेन्द्रानंद गिरि ने बताया कि महाआरती के दौरान साड़ी विधिवत मां अन्नपूर्णा को समर्पित की गई। इस अवसर पर न्यासी मंडल के सदस्य विनोद अग्रवाल, सत्यनारायण शर्मा, श्याम सिंघल और सुनील गुप्ता तथा दानदाता परिवार के मनीष बंसल, दिनेश बंसल और मुकेश गुप्ता उपस्थित रहे।
:: मां गायत्री और महाकाली के लिए भी बन रहीं साड़ियां ::
अन्नपूर्णा मंदिर के गर्भगृह में मां अन्नपूर्णा के साथ मां गायत्री और मां महाकाली भी विराजित हैं। दोनों देवियों के लिए भी पांच-पांच किलो चांदी की साड़ियां तैयार की जा रही हैं। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इन्हें दिसंबर में अन्नपूर्णा जयंती पर समर्पित किए जाने की संभावना है। इसके बाद तीनों देवियां पांच-पांच किलो चांदी की साड़ियों में सुशोभित होंगी।
:: नवमी पर विशेष श्रृंगार, मंगलवार को यज्ञ की पूर्णाहुति ::
नवमी पर तीनों देवियों का विशेष श्रृंगार कर पुष्पों से सजाया गया और प्रिय व्यंजनों का भोग लगाया गया। कन्या पूजन भी हुआ। मंदिर परिसर की पुष्प, विद्युत और दीप सज्जा आकर्षण का केंद्र रही। दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। शाम की महाआरती में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। देर रात तक मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। मंदिर में चल रहे शतचंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति मंगलवार को अभिजीत मुहूर्त में होगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।

