भगदड़ मची लेकिन लोग बाल-बाल बचे
बेंगलुरु । कर्नाटक के शिवमोग्गा में बुधवार को दशहरा जुलूस के दौरान उस समय अफरातफरी मच गई, जब देवी की अंबारी लेकर चल रहा हाथी सोमन्ना अचानक बिदक गया। करीब 800 मीटर आगे बढ़ने के बाद हाथी पीछे की ओर दौड़ने लगा, जिससे रास्ते में एक कार क्षतिग्रस्त हुई और एक मकान को भी नुकसान पहुंचा। इस दौरान हाथी की पीठ पर रखी देवी की अंबारी बुरी तरह टूट गई। हालांकि, अधिकारियों ने किसी अप्रिय घटना या बड़ी जनहानि से इनकार किया है।
शिवप्पा नायक पैलेस के सामने नंदी ध्वज की पूजा के बाद दशहरा जुलूस शुरू हुआ। इस बार देवी की प्रतिमा वाली अंबारी हाथी सोमन्ना की पीठ पर रखी गई थी। आमतौर पर यह जिम्मेदारी सागर नाम के हाथी को मिलती है, लेकिन उसके पैर में चोट लगने के कारण साकरबैलू हाथी शिविर के कर्मचारियों ने मंगलवार रात सोमन्ना को यह काम सौंपा था। जुलूस निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार शुरू हुआ, जिसमें सबसे पहले सागर, उसके बाद सोमन्ना और सबसे पीछे बहादुर हाथी चल रहा था। जुलूस जब एसपीएम रोड पर करीब 800 मीटर आगे पहुंचा, तो सोमन्ना अचानक घबरा गया और पीछे मुड़कर उसी रास्ते पर दौड़ने लगा। उसे पीछे भागता देख बहादुर भी उसके पीछे दौड़ पड़ा। सोमन्ना ने वासवी स्कूल के सामने से गुजरते हुए एक सड़क किनारे खड़ी कार को उठाकर दूसरी ओर फेंक दिया। इसके बाद वह पोस्ट ऑफिस रोड की तरफ बढ़ा और एक मकान को भी क्षति पहुंचाई। पोस्ट ऑफिस इलाके की ओर लौटते समय वह सड़क किनारे खड़ी एक अन्य कार से भी टकराया, जिससे उसकी पीठ पर रखी अंबारी दाईं ओर झुक गई।
हाथी के कुछ देर रुकने पर पशु चिकित्सक ने उसे शांत करने के लिए ट्रैंक्विलाइजर का इंजेक्शन दिया। इसके बाद उसकी गतिविधियां रुक गईं और वन विभाग के कर्मचारियों ने बहादुर की मदद से उसे काबू में किया। बाद में सोमन्ना और बहादुर को कोटे अंजनेय मंदिर के पास खुले मैदान में ले जाया गया, जहां दोनों हाथियों ने कुछ देर आराम किया। वहां उनके पैरों में बेड़ियां लगाई गईं और फिर उन्हें जिला प्रशिक्षण केंद्र के अस्थायी बाड़े में पहुंचाया गया। कार से टकराने के बाद अंबारी का ढांचा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। अंबारी में रखी देवी की प्रतिमा को अंजनेय मंदिर में सुरक्षित रखा गया, जबकि देवी को पहनाए गए कुछ आभूषण सड़क पर बिखरे मिले। नगर निगम आयुक्त मयन्ना गौड़ा ने बताया कि उत्सव में इस्तेमाल होने वाली दूसरी प्रतिमा उपलब्ध थी। इसी प्रतिमा के साथ अल्लमप्रभु मैदान में बन्नी मुडियुवा की रस्म पूरी की गई। अधिकारियों के मुताबिक, नुकसान केवल अंबारी के ढांचे को हुआ है, प्रतिमा और आभूषण सुरक्षित हैं।

