-यौन शोषण मामले में बरी किए जाने के बाद महिला पहलवानों ने आदेश को दी है चुनौती
नई दिल्ली । दिल्ली की एक अदालत ने बीजेपी के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह की और मोहलत दी। हालांकि, कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह आखिरी बार है जब उन्हें अलग से समय दिया गया है। इस अवधि में यदि उन्होंने जवाब दाखिल नहीं किया तो उन्हें आगे मौका नहीं दिया जाएगा। यौन शोषण मामले में बृजभूषण शरण सिंह को बरी किए जाने के बाद महिला पहलवानों ने आदेश को चुनौती दी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 3 अगस्त को बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को छह महिला पहलवानों की ओर से दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया था। इन पहलवानों में विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहलवान भी शामिल हैं। बृजभूषण को बरी किए जाने के फैसले को चार महिला पहलवानों ने चुनौती देते हुए 25 सितंबर को अपील दायर की गई थी। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह की कोर्ट ने 9 अक्टूबर को भी जवाब देने के लिए मोहलत देते हुए 28 अक्टूबर की तारीख दी थी, लेकिन इस बीच बृजभूषण ने जवाब नहीं दिया। 28 सितंबर को बृजभूषण, दिल्ली सरकार और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को नोटिस जारी किए थे। कोर्ट ने जब दिल्ली पुलिस से पूछा था कि क्या वह इस मामले में अपील दायर करेगी, तो सरकारी वकील ने कहा कि इस पर अभी फैसला नहीं लिया गया है।
कोर्ट ने कहा था कि दलीलें शुरू होने के बाद कार्यवाही बंद कमरे में होगी। सुनवाई में बृजभूषण सिंह कोर्ट में मौजूद थे। पहलवानों ने अपनी याचिका में कहा है कि बरी किए जाने का फैसला कानूनी रूप से सही नहीं है। उन्होंने दलील दी कि यह फैसला रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों के स्पष्ट रूप से गलत और चुनिंदा आकलन और अनुमानों और अटकलों पर आधारित है और इसमें कानून के स्थापित और बाध्यकारी सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया है।

