दीपावली पर कर्मचारियों को बोनस न देने पर कंपनी पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई

देश-विदेश

भारत में बोनस देना एक परंपरा नहीं, श्रम कानूनों के तहत एक कानूनी दायित्व है
नई दिल्ली । त्योहारी सीजन में निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के कर्मचारी वार्षिक बोनस और उपहारों का बेसब्री से इंतजार करते हैं। भारत में पात्र कर्मचारियों को बोनस देना एक परंपरा नहीं, बल्कि श्रम कानूनों के तहत एक कानूनी दायित्व भी है। श्रम कानूनों के मुताबिक यदि कोई कंपनी पात्र कर्मचारियों को अनिवार्य बोनस देने से इनकार करती है, तो उसे दंडात्मक कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
भारत में कर्मचारियों के बोनस से जुड़े नियमों का नियमन पहले पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट, 1965 के तहत होता था, जिसे अब नए श्रम कानूनों के अंतर्गत कोड ऑन वेजेज, 2019 में शामिल कर दिया गया है। इन कानूनों के तहत किसी संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों की पात्रता, वेतन सीमा और सेवा अवधि के आधार पर बोनस तय किया जाता है। कानून के मुताबिक पात्र कर्मचारियों को न्यूनतम 8.33 फीसदी से लेकर अधिकतम 20 फीसदी तक बोनस देने का प्रावधान तय है। अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या बोनस न देने पर कंपनी के मालिक को जेल हो सकती है। श्रम विशेषज्ञों के मुताबिक किसी पात्र कर्मचारी को अनिवार्य बोनस न देने की स्थिति में कंपनी पर जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाइयां की जा सकती हैं।
हालांकि केवल बोनस न देने पर जेल भेजने की स्वचालित व्यवस्था नहीं है, बल्कि मामला श्रम विभाग में जाने के बाद जांच और अदालती प्रक्रिया के तहत परिस्थितियों के आधार पर फैसला लिया जाता है। जानकारों की सलाह है कि यदि किसी संस्थान द्वारा पात्रता के बावजूद बोनस का भुगतान नहीं किया जाता है, तो कर्मचारी पहले अपने मानव संसाधन विभाग या प्रबंधन से लिखित रूप में स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। समाधान न होने की स्थिति में संबंधित क्षेत्र के श्रम अधिकारी या श्रम विभाग के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि दीपावली पर दिया जाने वाला स्वैच्छिक उपहार और कानून के तहत मिलने वाला अनिवार्य वार्षिक बोनस दो अलग-अलग बातें हैं।