थे एक अफसर। थे कम। दिखते ज्यादा। बुद्धिमान थे कम। दिखते ज्यादा। बुद्धिमानी के सारे काम भयंकर मूर्खता से ही करते। एकदम मूर्खधारी बुद्धिमान! नैतिक थे कम। बनते ज्यादा। दुबले-पतले। कभी सीट पर बैठ भी जाते तो टॉर्च से ढूंढ़ना पड़ता। कुर्सी पे कभी दिखाई नहीं पड़ते। वीर थे नहीं। वीरता दिखाते ज्यादा। ऑफिस के चपरासी से डरते और कार्यालय अधीक्षक को सस्पेंड करने के शिकारी किस्से सुनाते। वीरता इतनी भरी थी की मरे चूहे को कुशलता पूर्वक मारने में पसीने-पसीने हो जाया करते। चूहा मारने का मौलिक हत्यारे संबंधी क्रेडिट ले जाते। भाषण देते तो बस देते ही रहते। कहते -बोलिए भारत माता की जय! देवियो सज्जनो! हमें अपना कार्य पूर्ण ईमानदारी से करना चाहिए। हमें सरकार का कार्य पूर्ण तत्परता से करना चाहिए। ईश्वर ने सरकारी नौकरी दी है तो हमें इस उपहार को नैतिकता से निभाना चाहिए। ईमानदारी की बात करते तो 30% बाबू खिसक लेते। तत्परता के समय 40% श्रोता भागने में तत्परता दिखाते। शेष 30% नैतिकता निभाने के लिए नैतिकता औढ़कर शीघ्र ही अपने-अपने घरों की ओर लौट जाते। दरी बिछाने वाला, टेंट वाला और माइक वाला; ये त्रिदेव भाषण समाप्ति पश्चात फूलों की बरसात करने के लिए आकाश लोक में नगाड़े बजाते। इन त्रिदेवों की ही भाषण श्रवण में तत्परता बनी रहती ताकि कब इनका पिंड छूटे और कब दरियां उठाएं।
सर जी पूरी ईमानदारी दिखाते। भ्रष्टाचार का अपना 90% हिस्सा पूरी-पूरी ईमानदारी से ग्रहण करते। कभी अपना हिस्सा बाकी नहीं छोड़ते। दशहरे पर रावण जलाने का कार्य पूरी ईमानदारी पूर्वक बेईमानी से संपन्न करते। कोरोना काल में कफन-काठी में से अपना हिस्सा मांगने की चतुराई बेहतरीन ढंग से संपादित करते। गांधी जयंती पर स्वदेशी का राग अलापते। इस अवसर पर स्वदेशी से ही काम चलाते। स्वदेशी शराब और स्वदेशी नृत्य! पूर्णत: अद्धावान! इन सबके साथ कन्या भी स्वदेशी। टेरिलीन सूट की जेब में खादी का रुमाल ऊपर तक निकला होता। खादी का यह रुमाल वातावरण को सूंघने में हमेशा तत्पर रहता। बीड़ी नहीं पीते। यह दुर्गुण उनमें नहीं था। शराब ही पीते थे और उसके साथ सिगरेट के कश खींचते। जब भी ऑफिस आते ठीक समय दोपहर को 3:30 बजे बाद ही आते। आधा घंटा पूजा पाठ करते। अगले आधे घंटे फिर किसी पूजा का पाठ ही करते। फिर निरंतर किसी न किसी पूजा का पाठ ही करते रहते। उसके आधे घंटे बाद वेअंतर्धान हो जाते। ऐसे यशस्वी श्रद्धावान अफसर जगह-जगह अजगर की तरह सजे-जमे, पड़े-अड़े अद्धावान रूपा विराजित हैं। अजगर-अफसर करे ना चाकरी; बाबू करे न काम। सफेद हाथी सरकार बांधती; पड़े करो आराम!
— रामविलास जांगिड़,18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान