उत्तर आधुनिक डायलॉगबाजी

उत्तर आधुनिक जमाने से डायलॉग फूट रहे हैं। एक डायलॉग मॉम ने अपने बेटे से किया- बेटे! एक हाथ में मोबाइल ले ले और दूसरे हाथ में टीवी का रिमोट पकड़ ले ले। तब तक मैं खाना लगाती हूं। माय लवली चाइल्ड! मैंने तुम्हारे लिए अभी एक बर्गर ऑर्डर दिया था, जो बाजार से हमारे ड्रोन ने डाइनिंग टेबल पे रख दिया है। हॉस्पिटल में डायलॉग भारी है। डॉक्टर किसी परिजन को कह रहे हैं- आप इन्हें सही समय पर ले आए हैं। अगर थोड़ी भी देर और हो जाती तो इन्हें मारना मुश्किल हो जाता। वैसे घबराने की कोई बात नहीं है। मैंने इन्हें इंजेक्शन दे दिया है। कल सुबह तक इन्हें होश नहीं आएगा। आपके ऑर्डर के मुताबिक कल तक यह इंसान मुर्दे में तब्दील हो जाएगा। लेकिन आप होश में रहना और और मेरा बिल केश में ही देना। मेरी कोशिश पूरी है; लेकिन आपके लिए अगले 24 घंटे नाजुक हैं, भगवान से प्रार्थना करिए कि ये बंदा आपकी इच्छा अनुसार ही सलट जाए। 

इंसान से मुर्दे में तब्दील बंदे की सांसें कह रही है- भगवान के लिए मुझे छोड़ दो। ये लो ब्लैंक चेक ले लो। इस पर अपनी कीमत लिख लो और मुझे इस हॉस्पिटल से घर ले चलो। इस पवित्र अवसर पर डॉन बना परिजन अपनी निजी पत्नी को कहता है- मोना डार्लिंग! ये तो खुशी के आंसू हैं! इन्हें यूं ही कोई जाया नहीं करते। तभी एक दोस्त हॉस्पिटल में आया और कहने लगा- मैं इधर से गुजर रहा था सोचा आपसे मिलता चलूं। मुझे पता है कि आप अपने परिजन को मुर्दा बनाने के कार्यक्रम में इधर नए हॉस्पिटल टूरिज्म पर हैं। और हां! इनसे मिलिए ये हैं शहर के मशहूर प्राइवेट श्मशान घाट के ग्रांड बिजनेसमैन! करीब 9 देशों एवं 75 शहरों में उनके श्मशान घाट फैले हैं। मेरी कोई मदद हो तो जरूर कहिएगा। मीट माई सन विक्की, आज ही विलायत से पढ़ाई पूरी करके लौटा है। बाई दा वे आपकी डॉटर इधर नहीं दिख रही है!

चुनावी साल में डायलॉग बहुत पल रहे हैं। सच तो यह है कि घर, परिवार और चुनावी अदालतें सबूतों से नहीं जज्बातों से ही चलती है। मेरे सभी सियासी फाजिल दोस्त चुनावी अदालतों में वोटरों का सिर्फ कीमती वक्त ही जाया करते हैं, मी लार्ड! परिवार और चुनावी अदालतें सारे सबूतों और गवाहों के बयानों के मद्देनजर किसी भी खास नतीजे पर नहीं पहुंचती है और हमेशा की तरह है मामला सारा गुड़ गोबर ही रहता है। नेता चमचों को हड़का रहा है- ड्राईवर, उस गाड़ी का पीछा करो। जल्दी! उसमें पिछली वाली गली का एक वोटर जा रहा है। इधर सरकार बन रही है और वोटर साहब कह रहे हैं- पता नहीं यह किसका पाप है? मैं उस नेता का गुरूर तोड़ कर रहूंगा। 

तभी लुटेरे नेताओं ने वोटर को चारों ओर से घेर लिया है। डायलॉग डिलीवरी की जा रही है- हमने तुम्हें चारों तरफ से घेर लिया है। हमें वोट देने के लिए खुद को चुपचाप हमारे हवाले कर दो। और हां; याद रखना! अगर कोई चालाकी करने की होशियारी की तो तुम्हारे सपनों के चिथड़े-चिथड़े उड़ा दिया जाएंगे। उत्तर आधुनिक जमाने का अपना एक जलवा है। पंडित जी का भी एक बलवा है। अथ: पंडित उवाच- कन्या को जल्दी से भगाइए। फेरों का मुहूर्त निकट आता जा रहा है। समधन बोली- अच्छा किया जो आपने मुझे बता दिया। आपका एहसान रहेगा पंडित जी! फिर डायलॉग- एहसान कैसा बीबीजी, ये तो आपकी चुकाई गई फीस का जलवा था। उत्तर आधुनिकता के डायलॉग सब पर भारी है!

रामविलास जांगिड़,18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान