बर्फीली रात

सोनी उत्तराखंड के एक छोटे से शहर में रहती थी। 

अपनी दादी के साथ अकेले रहती थी।उसके माता-पिता भूस्खलन में हुए हादसे में गुजर चुके थे। इस घटना को चार-पांच वर्ष हो चुके थे। सोनी पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट टाइम जॉब क्या करती थी। 

एक दिन रात करीब सात- आठ बजे सोनी की दादी के सीने में दर्द उठने लगा। सोनी घबरा गई। 

उसकी दादी को अस्थमा की शिकायत थी।

सोनी कहने लगी, “दादी दवाइयां खत्म हो गई थीं, तो आपने मुझे बताया क्यों नहीं? मैं दवा ले आती!”  सोनी जल्दी से इन्हेंलर ले आई। गनीमत था इन्हेलर से दादी को थोड़ी राहत मिली। 

सोनी ने कहा, “मैं जाती हूं अभी दवाई लेकर आती हूं!”

उसकी दादी ने कहा, “कोई जरूरत नहीं” इतनी रात को दवाई लाने की, बाहर बर्फबारी भी हुई है, अभी कुछ आराम लगा है, कल ले आना!”

सोनी ने कहा, “नहीं मैं भी लेकर आती हूं! “और वह निकल गई। 

रात का सन्नाटा था। बर्फीली वादियों में बर्फ भी चारों और बिछा हुआ था, उसी में वो चली जा रही थी। 

दवाई दुकान में जब वो दवाइयां ले रही थी, तो दो लड़के उसे घूर कर देख रहे थे। सोनी थोड़ी सहम भी गयी। 

दवाई लेकर आगे बढ़ी तो उसे लगा कि वो लड़के उसका पीछा कर रहे हैं। 

पर उसने मुड़कर देखा तो कोई नहीं दिखा …और  जब सुनसान रास्ते में पहुंची तो ये उसकी गलतफहमी थी,वो लड़के सच में उसका पीछा कर रहे थे। 

उन्हें पीछा करते हुए देख वो घबरा गई…और तेज कदमों से आगे बढ़ने लगी। कुछ दूर और पहुंचने पर एक और लड़का उसे रास्ते में मिला जो उसके साथ साथ चलने लगा। 

अब तो सोनी को लगा कि आज वह बच नहीं पाएगी और वो सुरक्षित घर भी नहीं पहुंच पाएगी। 

उसे कुछ समझ में भी नहीं आ रहा था।वो घबराई हुई थी और इतनी ठंड में भी उसके माथे से पसीना निकल आया। पर वो तेज कदमों से आगे बढ़ती जा रही थी। 

वो चलती जा रही थी। उसे कुछ होश नहीं था। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। जब उसे लगा कि घर पास है, तब वो अचानक से रुक गई और उस लड़के से मुड़ कर कहने लगी, “क्या करना चाहते हो मेरे साथ! एक अकेली लड़की को देखकर उसका पीछा करते हुए तुम लोगों को शर्म नहीं आती! “

सोनी के चुप होने पर उस लड़के ने कहा, “तुम लोगों से क्या मतलब!” 

फिर उसने कहा, “जब वो दो लड़के आपका पीछा कर रहे थे,तो मैंने देख लिया था…और मैं आपके साथ चलने लगा…कुछ दूर जाकर मैंने पीछे मुड़ कर देखा …तो वो दोनों लड़के वापस मुड़ कर चले गए थे!” मैंने सोचा कि मैं आपको आपकी मंजिल तक महफूज़ पहुंचा दूं…इसलिए मैं आपके साथ चल रहा था!”

इधर उसकी दादी दरवाजे पर खड़ी सोनी की राह देख रही थी। अब सोनी को राहत मिली..और उसने उस लड़के से शुक्रिया अदा किया..और कहा इतनी दूर तक आ गए हो तो…पास में ही मेरा घर है चलो घर तक!”

वो लड़का सोनी के घर तक गया और कहा,”आप की जगह कोई भी होती तो मैं यही करता और आपकी जगह मेरी बहन भी हो सकती थी,ये तो मेरा फर्ज  था! “

सोनी दादी के साथ अंदर गई दादी ने सोनी से कहा, “अब से मैं पहले ही बता दिया करूंगी की दवाइयां खत्म हो गई है..इतनी रात को बाहर न निकला कर, जमाना ठीक नहीं है!” 

सोनी के जहन में बर्फीली रात आज खौफ की तरह बैठ गई थी..पर वो अंदर से महफूज़ भी महसूस कर रही थी। 

अनामिका मिश्रा 

झारखंड जमशेदपुर