ग़ज़ल

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कुछ मत बोलो 

बस चुप होलो 

कुछ हो, मन का

भेद न खोलो

क्यों घुटते हो 

जी भर रोलो 

खूब हो रोये 

मुँह तो धोलो 

थक गये रोकर 

अब तो सोलो 

बेहतर है तुम 

ख़ुद कि टटोलो

______धर्मेन्द्र गुप्त

के 3/10, ए, मां शीतला भवन, गायघाट,

वाराणसी-221001

8935065229