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कुछ मत बोलो
बस चुप होलो
कुछ हो, मन का
भेद न खोलो
क्यों घुटते हो
जी भर रोलो
खूब हो रोये
मुँह तो धोलो
थक गये रोकर
अब तो सोलो
बेहतर है तुम
ख़ुद कि टटोलो
______धर्मेन्द्र गुप्त
के 3/10, ए, मां शीतला भवन, गायघाट,
वाराणसी-221001
8935065229