‘नये वर्ष की हाॅरर (डरावनी) शुभकामनाएं’

रात भर चैन से सोने के बाद सुबह कुछ भी नहीं बदला। बनिये की दूकान खुली थी। लोग रोज की तरह ब्रेड का पैकेट और दूध प्रतिबंधित प्लास्टिक की थैली में लेकर जा रहे थे। मोबाइल पर चैट करते हुए चल रहे थे।  बाइक वाले समझदारी से काम लेते हुए चैट करते आदमी को डिस्टर्ब न कर साइड से निकल जाते। सड़क के गड्ढे भी एक तरफ सरक जाते। गडढ़ों को मालूम है इन साहब का तो कुछ होना नहीं? उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा? गिर ये जाएंगे और नगरपालिका वाले बंद गडढों को कर जाएंगे। अभी तक पंत का खुलासा नहीं हुआ। डिवाइडर गाड़ी से क्यों टकराया? गडढा बीच में क्यों आया? गडढा जिम्मेदार है या मोबाइल चैट? सोशल मीडिया ने पंत को लेकर सभी डरावनी शुभकामनाएं पोस्ट कर दीं। पंत ठीक होगा? कार का बीमा मिलेगा? नई कार आाएगी? आदि-आदि। इस झमेले में बेचारे गडढे की जिन्दगी बरबाद हो गई? जो भी गडढे को देखता है डरावनी शुभकामनाएं देने लगता। पता नहीं किसकी जान का दुश्मन है ये गडढा? जान भूत बनेगी या नेता? इस विचार से निकल कर बनिये को धन्य किया।  

बनिया तो धन्य हुआ, लेकिन गुप्ता जी ने धर लिया। नये वर्ष की शुभकामनाएं ठोंक दीं। ढाल बढ़ाई और कहा- आपको भी। परिवार सहित और जोड़ दिया। उनको फर्क नहीं पड़ा। वे सीधे मुद्दे पर आ गए। अरे …मास्क नहीं लगाया? 13 से 23 के बीच का समय बड़ा खतरनाक है। पूरे देश में लाॅक डाउन लगने वाला है। एक ब्रेड के पैकेट से क्या होगा? ऐसा करो दो पैकेट और ले लो? आज सुबह गूगल नहीं देखा? सोने के दाम पेट्रोल से कम हो गए हैं। दिल्ली में पेट्रोल 10 दस रुपये लीटर और गैस सिलेन्डर 50 का। और बोले-मैं तो सोच रहा हूं सचिन वाले विज्ञापन में दो-चार लाख लगा दूं? लेकिन नियम व शर्तों को ध्यान से पढ़ें? जब सब सही है तो डरावनी चेतावनी क्यों? 

बहरहाल …उनकी नज़र मेरे अकेले स्वैटर पर आ जमीं। अरे ये क्या आपने केवल एक स्वैटर पहना? मालूम हैं, पूरा सप्ताह शिमला जैसी ठंड पड़ेगी और सिंगल स्वैटर वाले कहीं खुदा को प्यारे न हो जाएं? मैंने सोचा ऐसी ठंड पिछले साल भी पड़ी थी। अखबारों ने लिखा था-दिल्ली हुई शिमला से ज्यादा ठंडी। मुहल्ले की आबादी 10 प्रतिशत बढ़ गई, लेकिन एक भी बुडढा कम न हुआ?

बहरहाल वे स्वैटर से और नीचे आते, मैंने टोक दिया। कहा-पिछले साल जितनी ईमानदारी थी, उतनी आज भी है। पिछले साल मर मर कर जी लिए, इस साल भी जी लेंगे। उनकी डरावनी शुभकामनाओं से डर लगता है। वे और एकाद और हाॅरर शुभकामना उछालते उससे पहले आॅफिस जाने की याद दिला दी। तब उन्हें याद आया उनका बाॅस पिछले साल वाला ही है। मुझे डरावनी शुभकामनाओं से छुटकारा मिल गया। 

एशिया की तीन सबसे हाॅंन्टेड (डरवाने) स्थानों में भानगढ़ किले का नाम सर्वोपरि आता है। पिछले वर्ष रात जब सोया था। सब ठीक ठाक था। सुबह उठा तो लगा भानगढ़ के किले में छत रहित महल और दीवारों के बीच खड़ा हूं। ऐसा लग रहा था-एक डरावनी शुभकामना इधर से आ रही है, दूसरी उधर और तीसरी भीतर से डरते-डरते निकल रही है। मुसीबत और शुभकामनाएं अकेले नहीं आतीं। डरवानी शुभकामनाएं भय पैदा करती हैं। शादी की शुभकामना है तो पार्टी के खर्चे का भय, शादी की वर्षगांठ की शुभकामनाएं हैं तो शादी बचाने का भय, नव वर्ष की शुभकामना है तो पुराने वर्ष के कर्ज का भय, गाड़ी की शुभकामना है तो ई एम आई का भय, प्रमोशन की शुभकामना है तो ट्रांसफर का भय, बेटे का एडमिशन है तो फीस का भय। ऐसा लगता है आदमी भानगढ के किले के प्रागंण में खड़ा है और चारों से शुभकामनाएं चीख-चीख कर कह रही हों-हमसे डरो, हम हर साल आएंगी। 

भूतों से इतना डर नहीं लगता, जितना शुभकामनाओं से डर लगता है। इस वर्ष की हाॅरर शुभकामनाएं हाथ फैलाएं खड़ी हैं। चीन में कोरोना का कहर, सड़कों पर गडढों का ताण्डव-कितने और पंत? कुछ राज्यों में चुनाव, न्यायपालिका और कार्यपालिका में तनाव, ईमानदारी की वापसी? राज्यों में शराब बंदी की डरावनी खबर? टाॅप डरावनी शुभकामना का कार्यकाल पांच साल निश्चित है। कृपया, शुभकामनाएं वो ही दें, जिनसे भय पैदा न हो।  

सुनील जैन राही

पालम गांव

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