मप्र-महाराष्ट्र के संबंध मात्र भौगोलिक नहीं, साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक : डॉ. यादव

मध्य प्रदेश

:: जबलपुर मराठी स्कूल के शताब्दी समारोह को मुख्यमंत्री ने किया संबोधित ::
इंदौर | विशेष संवाददाता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर के शिप्रा से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जबलपुर स्थित मराठी स्कूल के सौ वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के संबंध केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह साझा सांस्कृतिक परंपरा की एक अटूट विरासत है।
डॉ. यादव ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के काल में मुगलों के विरुद्ध संघर्ष में मध्यप्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बाजीराव पेशवा, शिंदे, गायकवाड़ से लेकर होलकर शासन तक दोनों राज्यों के संबंधों की जो नींव पड़ी, वह आज भी उतनी ही सुदृढ़ है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, मैं महाकाल की नगरी में बैठकर भगवान विट्ठल का आशीर्वाद प्राप्त कर रहा हूँ।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 1926 में स्थापित महाराष्ट्र शिक्षण मंडल की सराहना करते हुए कहा कि एक शताब्दी की यात्रा में इस संस्था ने नई पीढ़ियों को गढ़ने का महती कार्य किया है। इसकी सामाजिक और बौद्धिक उपलब्धियां नवाचार का प्रमाण हैं। संबोधन से पूर्व मुख्यमंत्री ने स्व. अटल बिहारी वाजपेयी, स्व. सुन्दरलाल पटवा और स्व. कुशाभाऊ ठाकरे के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
:: नवाचार और चरित्र निर्माण से समृद्ध हो रही प्रदेश की शिक्षा ::
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। संस्कारों के बीजारोपण के लिए प्रदेश के अधिकांश जिलों में सांदीपनि विद्यालयों की शुरुआत की गई है। वहीं, पीएम राइज विद्यालयों के माध्यम से आधुनिक शिक्षा के उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त हो रहे हैं।
उच्च शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए राज्य सरकार ने खरगोन में टंट्या भील विश्वविद्यालय, ग्वालियर में तात्या टोपे विश्वविद्यालय और रानी अवंतिबाई विश्वविद्यालय की स्थापना की है। वर्तमान में प्रदेश में 50 से अधिक विश्वविद्यालय संचालित हैं, जो निर्धन विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।